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Duration3:52

माटी की पुकार

सखी रागिनी

भारतीय लोक संगीत

About

यह गीत पारंपरिक ढोलक और हारमोनियम की मधुर जुगलबंदी के साथ ग्रामीण भारत की माटी की खुशबू को दर्शाता है। इसमें सूक्ष्म स्वर-लहरियों और लयबद्ध गायन का प्रयोग किया गया है जो लोक संस्कृति की जड़ों से गहराई से जोड़ता है।

Lyrics

intro

ओ रे मनवा, जाग ज़रा,माटी की खुशबू ले आई हवा।नदी किनारे, पीपल छाँव,सजने लगा है अपना गाँव।

verse

खेतों में लहराती सोना सी बालियाँ,हँसती हैं देख के अमराई की डालियाँ।पग-पग पर गूँजे मीठी सी रागिनी,धरती ओढ़े है हरियाली ओढ़नी।बछड़े पुकारें, माँ की ममता जगे,राहों में खुशियाँ, कदम ये डगे।

refrain

ओ सखी री, मंगल गाओ,सावन के गीत सुनाओ।मिट्टी का चंदन, माथे लगाओ,अपनेपन की अलख जगाओ।ओ सखी री, मंगल गाओ।

verse

दादी की बातों में किस्से पुराने हैं,नदियों के बहते ये अनकहे तराने हैं।चौपाल सजी है, बुज़ुर्गों का डेरा,अंधियारे मन में हुआ उजियारा सवेरा।पीढ़ी दर पीढ़ी ये रिश्ता निभाना,मिट्टी से जुड़कर ही सब कुछ है पाना।

refrain

ओ सखी री, मंगल गाओ,सावन के गीत सुनाओ।मिट्टी का चंदन, माथे लगाओ,अपनेपन की अलख जगाओ।ओ सखी री, मंगल गाओ।

instrumental-break
refrain

ओ सखी री, मंगल गाओ,सावन के गीत सुनाओ।मिट्टी का चंदन, माथे लगाओ,अपनेपन की अलख जगाओ।

outro

साँझ ढले, अब दीप जलाओ,घर-आँगन में खुशियाँ सजाओ।जुड़कर रहना, रीत पुरानी,मिट्टी की ये अमर कहानी।अमर कहानी... अमर कहानी...

माटी की पुकार

सखी रागिनी

Preview

माटी की पुकार - सखी रागिनी | AI-Generated Song