शून्य का सफर
आकाशवाणी तरंग
इंडियन इलेक्ट्रॉनिक
About
यह ट्रैक राग आधारित मेलोडी और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक बीट्स का एक जटिल मिश्रण है। इसमें तबला के पॉलीरिदम और सिंथेसाइज़र के वायुमंडलीय साउंडस्केप का उपयोग किया गया है, जो एक ध्यानमग्न और रहस्यमयी अनुभव प्रदान करता है।
Lyrics
रेत की घड़ी में सिमटा हुआ वक्तसांसों की डोर में उलझा हुआ ये सफरआँखें मूंद लूँ तो दिखता है जोवो कहीं खो गया है या बस यहीं है?
आ... सा... रे... ग... म...सुनहरी धुंध में लिपटी हुई ये शामेंपुरानी यादों के धुएं में खोई हुई बातेंक्या ये सच है?या बस एक परछाईं का शोर?
धड़कन की रफ़्तार बढ़ती जा रही हैजमीन खिसक रही है, रूह उड़ रही हैपुराने रास्तों की धूल झाड़ केमैं खुद से ही मिलने निकल रही हूँतेजी से, और तेजी सेसब कुछ धुंधला, सब कुछ साफ़
मैं हूँ यहाँ, मैं हूँ वहांहवाओं में घुली हुई मेरी दास्तांना कोई सरहद, ना कोई ठिकानाबस एक लहर, बस एक बहानामैं हूँ यहाँ, मैं हूँ वहांमिट रहा है ये सारा जहान
ठहर जाओ, बस एक पल के लिएशोर को थमने दो, खुद को बहने दोवो जो अंदर दबी थी, वो प्यास क्या है?ये भागती हुई दुनिया, ये आभास क्या है?सब राख है, सब राख हैफिर भी ये आग क्यों जल रही है?
मैं हूँ यहाँ, मैं हूँ वहांहवाओं में घुली हुई मेरी दास्तांना कोई सरहद, ना कोई ठिकानाबस एक लहर, बस एक बहानामैं हूँ यहाँ, मैं हूँ वहांमिट रहा है ये सारा जहान
सांसें शांत हैंआसमान खाली हैमैं बस एक बिंदु हूँअनंत में खोया हुआबस मैं...सिर्फ मैं...शून्य।
शून्य का सफर
आकाशवाणी तरंग
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