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Duration3:35
रूह का सावन तराना
पंडित नीलमेघ विनायक
हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत
About
यह रचना सावन की सुंदरता को राग-आधारित माधुर्य में पिरोती है, जिसमें तानपुरा की गूंज और तबले का सटीक लयबद्ध चक्र एक शांत वातावरण बनाता है। इसमें राग का अनूठा आलाप और जटिल गमकों का प्रयोग प्रकृति के बदलते स्वरूप को जीवंत करता है।
Lyrics
यहां बान्धन की पहली यहां बान्धन की पहली यहां बान्धन की पहली यहां बान्धन की पहली यहां बान्धन की पहली यहां बान्धन की पहली यहां बान्धन की पहली यहां बान्धन की पहली यहां बान्धन की पहली यहां बान्धन की पहली यहां बान्धन की पहली यहां बान्धन की पहली यहां बान्धन की पहली यहां बान्धन की पहली यहां बान्धन की पहली
रूह का सावन तराना
पंडित नीलमेघ विनायक
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