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Duration3:38
भटकती रूह का किनारा
पंडित अद्वैतानंद जोशी
हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत
About
यह रचना ड्रोन तानपुरा की गहरी गूँज और तबला के लयबद्ध चक्रों के साथ शुरू होती है, जो श्रोता को एक ध्यानपूर्ण अवस्था में ले जाती है। इसमें राग-आधारित मधुर सुधार (improvisation) का समावेश है, जो दैवीय भक्ति के भाव को अत्यंत स्पष्टता और प्राकृतिक अनुनाद के साथ प्रस्तुत करता है।
Lyrics
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भटकती रूह का किनारा
पंडित अद्वैतानंद जोशी
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