मुट्ठी से फिसलती रेत
पंडित समयानंद ठाकुर
हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत
About
यह रचना समय की निरंतरता को दर्शाती है, जिसमें तानपुरा का गूंजता हुआ ड्रोन और तबले का लयबद्ध चक्र एक गहरा ध्यानमग्न वातावरण बनाता है। राग आधारित मेलोडिक इम्प्रोवाइजेशन के माध्यम से जीवन के क्षणभंगुर स्वभाव को स्वरबद्ध किया गया है, जो श्रोता को एक दार्शनिक यात्रा पर ले जाता है।
Lyrics
अबासु हूँ एक आभास जानू मैं जिन्दगी हूँ बसूस अभासु हूँ एक आभास जानू मैं जिन्दगी हूँ बसूस अभासु हूँ एक आभास जानू मैं जिन्दगी हूँ बसूस अभासु हूँ जानू मैं जिन्दगी हूँ बसूस अभासु हूँ जानू मैं जिन्दगी हूँ बसूस अभासु हूँ जानू मैं जिन्दगी हूँ बसूस अभासु हूँ एक आभासु हूँ एक आभासु जानू मैं जिन्दगी हूँ बसूस अभासु हूँ जानू मैं जिन्दगी हूँ बसूस अभासु हूँ जानू मैं जिन्दगी हूँ बसूस अभासु हूँ जानू मैं जिन्दगी हूँ बसूस अभासु हूँ एक आभासु जानू मैं जिन्दगी हूँ बसूस अभासु हूँ जानू मैं जिन्दगी हूँ बसूस अभासु हूँ एक आभासु जानू मैं जिन्दगी हूँ बसूस अभासु हूँ जानू मैं जिन्दगी हूँ बसूस अभासु हूँ एक आभासु जानू मैं जिन्दगी हूँ बसूस अभासु हूँ जानू मैं जिन्दगी हूँ बसूस अभासु हूँ एक आभासु जानू मैं जिन्दगी हूँ बसूस अभासु हूँ जानू मैं जिन्दगी हूँ बसूस अभासु हूँ एक आभासु जानू मैं जिन्दगी हूँ बसूस अभासु हूँ एक आभासु जानू मैं जिन्दगी हूँ बसूस
मुट्ठी से फिसलती रेत
पंडित समयानंद ठाकुर
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