भीगी मिट्टी का नशा
पंडित रिमझिमकांत मिश्र
हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत
About
यह रचना सावन के आगमन को समर्पित एक शास्त्रीय बंदिश है, जिसमें तानपुरा के निरंतर गुंजन और तबले के जटिल ताल चक्र का अद्भुत समन्वय है। राग आधारित मेलोडिक इम्प्रोवाइजेशन के माध्यम से प्रकृति की जीवंतता और वर्षा की फुहारों के मधुर संगीत को स्वरबद्ध किया गया है।
Lyrics
अभास गही रावडा से मन हर पल तुम्हारा निकाला सड ये इनकी बन्नों में डाले गुलाब वो प्रीत मैंने निकाला सड अभास गही रावडा से मन हर पल तुम्हारा निकाला सड ये इनकी बन्नों में डाले गुलाब वो प्रीत मैंने निकाला सड कहा मैं चुप हूँ चुप बैठा रहा हूँ मैं खो गया हूँ इस अंदर की में ये जैसे खंचल निकाले गुलाब वो प्रीत मैंने निकाला सड कहा मैं चुप हूँ चुप बैठा रहा हूँ मैं खो गया हूँ इस अंदर की में ये जैसे खंचल निकाले गुलाब वो प्रीत मैंने निकाला सड सुनूगा जो मैं तुम्हारा नाम वो नैनों वाले निकाला सड कहा रहूं मैं कहा चलूं मैं मैं खो गया हूँ इस अंदर की में सुनूगा जो मैं तुम्हारा नाम वो नैनों वाले निकाला सड कहा रहूं मैं कहा चलूं मैं मैं खो गया हूँ इस अंदर की में ये तुम्हारे बुकरे तुम्हारा नाम वो नैनों वाले निकाला सड ये इनकी बंडों में डाले गुला मैं खो गया हूँ इस आला सड सुनूगा जो मैं तुम्हारा नाम वो नैनों वाले निकाला सड कहा रहूं मैं कहा चलूं मैं मैं खो गया हूँ इस अंदर की मैं ये तुम्हारे बुकरे तुम्हारा नाम ये इनकी बंडों में डाले गुला मैं खो गया हूँ इस आला सड कहा रहूं मैं कहा चलूं मैं मैं खो गया हूँ इस अंदर की मैं
भीगी मिट्टी का नशा
पंडित रिमझिमकांत मिश्र
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