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Duration3:31

शून्य का प्रकाश

पंडित नीरव हृदय

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत

About

यह रचना तानपुरा की गूँज और तबले के जटिल ताल चक्र के साथ शुरू होती है, जिसमें राग आधारित स्वर विस्तार का गहरा अनुभव मिलता है। इसमें आध्यात्मिक मुक्ति के भाव को स्वरबद्ध किया गया है, जहाँ गायन की बारीकियां और वाद्य यंत्रों का नैसर्गिक नाद एक ध्यानमग्न वातावरण का निर्माण करते हैं।

Lyrics

शै शै शै शै शै शै शै शै शै शै शै शै शै शै शै शै शै शै शै जित जाया आमे गुजार जित जाया मुक्ति गुजारे आपने शै शै शै शै शै शै शै शै मेरे मुक्ति का वास देवा शै शै शै शै शै शै शै शै मेरे मुक्ति का वास देवा मेरे मुक्ति का वास देवा शै शै शै शै शै शै शै शै मुक्डारना तुबाने बोले सक्ति भजारे आपने शै शै शै मेरे मुक्ति का वास देवा शै शै शै शै शै शै शै शै मुक्डारना तुबाने बोले सक्ति भजारे आपने शै शै शै शै शै शै शै मेरे मुक्ति का वास देवा मेरे मुक्ति का वास देवा शै शै शै शै शै शै शै मुक्डारना तुबाने बोले सक्ति भजारे आपने शै शै शै शै शै शै शै मेरे मुक्ति का वास देवा शै शै शै शै शै शै शै मुक्डारना तुबाने बोले सक्ति भजारे आपने शै शै शै शै शै शै शै मेरे मुक्ति का वास देवा मेरे मुक्ति का वास देवा शै शै शै शै शै शै शै मेरे मुक्ति का वास देवा

शून्य का प्रकाश

पंडित नीरव हृदय

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शून्य का प्रकाश by पंडित नीरव हृदय | EchoLoRA: Generate a Song with AI