यादों का सिलसिला
गली का ग़ज़ल
Desi Hip Hop
About
यह ट्रैक भारी 808 सब-बास और जटिल ट्रैप-स्टाइल हाई-हैट्स के साथ एक गहरा भावनात्मक सफर है। इसमें तबले की पारंपरिक ताल और आधुनिक सिंथेसाइज़र का अनूठा मिश्रण है, जो हिंदी में रची गई रोमांटिक तड़प को जीवंत करता है।
Lyrics
सुनो ये गलियों का शोर नहीं ये सच का तमाशा है मुखाटो के पीछे चिपी हुई ये एक नई परिभाश है कलम मेरी तलवार है और पन्ना मेरा मैदा सुनो गोर से ये वक्त का है फर्मान सफ़िद कुर्टे के नीच से काले रादे पलते हैं गरीबों की थाली से ये अपनी तीजोरी भड़ते हैं कहते हैं विकास होगा पर सड़काज भी डूटी हैं इनकी जुबान से निकली हर बात एक पुरानी लूटी है माई करो फोन था में मैं सच की आग उगलूंगा जूटों के महलों की अब नी मैं हिला दूँगा एक कुरसी का खेल है यहां वफादारी बिक्ती है खून पसीने की कमाई यहां सरेम लुटी है आंखे खोलो देखो ये कैसा दोर आया है इंसानियत को बेच कर इन्होंने अपना घर सचाया है उठो अब जग जाओ तिप का पैया भूमेगा सच का सूरज पिर से इन अंधेरों को चूमेगा ये कुरसी का खेल है या शतरंज की बेसात है और तरफा अंदेरा बस जूटी सीख बत हम लड़ेंगे हम बढ़ेंगे अब मैं जुपने वाले हैं सच के सिबाहे पीवी पे बहस देखो ये कैसे शोर मचाते हैं मुद्दों को छोड़के ये धर्म का जहर फैलाते हैं शिक्षा नहीं स्वास्ति ये नहीं बस नफर्द का व्यापार है इनकी सत्ता के खेल में आम अदमी ही लचार है मैं गलियों का बेटा हूँ मैंने दर्द को करीब से देखा है इनकी चलाकियों का मैंने हर एक बेच देखा है कागज के इन तुकडों पर अब सचाई लिखी जाएगी इनकी हुकूमत की जड़े अब उखाड फिंकी जाएगी शोर मचाओ रोके अदमदाओ एक उड़सी का खेल है या शतरंज की बिसाद है हर तरफ अंदेरा बस जोड़ी सी के बाद हम लड़ेंगे हम बढ़ेंगे आपने रुखने बागे हैं सच के सिपाहे रुखना मत सच का साथ देना है जंग लंबी है परचीत का परचम लहरा नाबस बस सच कहना परचीत का परचम लहरा नाबस
यादों का सिलसिला
गली का ग़ज़ल
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