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इंकलाब की गूँज
Duration3:46

इंकलाब की गूँज

पसीना सुल्तान

Desi Hip Hop

About

यह ट्रैक भारी 808 सब-बास और जटिल ट्रैप-स्टाइल हाई-हैट्स के साथ भारतीय शास्त्रीय तबला और सितार के नमूनों का एक शक्तिशाली मिश्रण है। इसमें सामाजिक असमानता के खिलाफ एक मुखर और बहुभाषी रैप प्रस्तुति दी गई है जो सुनने वाले को झकझोर कर रख देती है।

Lyrics

ये खेल है पुराना बस मौरे बदले हैं हुपर बैठे लोग निचे हम ही कुछले हैं आंके कुल देख ये जमेन का बटवार हाली भारी कोई घूगा ये कैसा नजारा एक तरफ बखमल एक तरफ बटे हुए कपड़े एक तरफ लैलों के दरवाजे एक तरफ हम पकड़े पसीने की कीमत यहाँ कौडी के बरापर है जो मेहनत करे बिन रात वही आज बदतर है किसमत का रोना रोते यहाँ सब मजबूर है हस्ती हक दाराज खुशियों से दूर है हाथों में चाले आखों में बस एक कास है पर सिष्टम की नसरों में हम बस एक बकवास है दिवारें उची कर दी फासा दिया इसानियत को हमने नफरत में जला दिया आप जागने का वक्त है यह शोर सुनाई देगा हर दाबे हुए गले से इंकलाब दिखाई देगा ये कैसी बराबरी ये कैसा है रावीरी भी चमक में गलीबों का है शोर मिटा दो ये लकीरे जो बांटी जमीन बदला लेंगे अब हुंगे हम वसीना ये खेल नहीं अब ये हन की लडाई है हमने अपनी मनजिल खुद ही बनाई है ये कैसी बराबरी ये कैसा है रावीरी भी चमक में गलीबों का है शोर मिटा दो ये लकीरे जो बांटी जमीन बदला लेंगे अब हुंगे हम वसीना ये खेल नहीं अब ये हन की लडाई है हमने अपनी मनजिल खुद ही बनाई है ये कैसी बराबरी ये कैसा है रावीरी भी चमक में गलीबों का है शोर मिटा दो ये लकीरे जो बांटी जमीन बदला लेंगे अब हुंगे हम वसीना ये खेल नहीं अब ये हन की लडाई है हमने अपनी मनजिल खुद ही बनाई है अब हुंगे हम वसीना ये खेल नहीं अपनी मनजिल खुद ही बनाई है अब हुंगे हम वसीना ये खेल नहीं अब

इंकलाब की गूँज

पसीना सुल्तान

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