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Duration2:52

जड़ों की पुकार

आकाश और माटी

Indian Electronic

About

यह ट्रैक पारंपरिक राग आधारित मेलोडी और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक बीट्स का एक अनूठा संगम है। इसमें तबले की जटिल लयबद्ध संरचनाओं को सिंथेसाइज़र के वायुमंडलीय साउंडस्केप के साथ जोड़ा गया है, जो आधुनिकता और परंपरा के बीच के द्वंद्व को दर्शाता है।

Lyrics

intro

मिट्टी की सोंधी खुशबू खो गई है कहींकांच के महलों में रूह सो गई है कहींपुरानी यादों की डोर अब हाथ से छूटीसपनों की नई दुनिया में हर बात है झूठी

raga-alap

सा रे गा म प ध नि सापुरखों की लकीरों का ये कैसा है निशानआधुनिकता की दौड़ में खोया अपना ईमानसा रे गा म प ध नि साधुंधली सी तस्वीरों में अब भी वो साया हैसमय के पहिये ने सबको ही भरमाया है

build-up

तारों के जाल में उलझे हैं ये ख्यालबदलते मौसमों का ये कैसा है जंजालमशीनों की धुन में दिल की धड़कन दबीपर जड़ों की गहराई अब भी है यहीं कहीं

drop

धड़कन बढ़ती है, रफ़्तार ये कहती हैपुरानी मिट्टी आज भी सीने में रहती हैबदलाव की लहर में बहते तो हम गएमगर अपनी ही गलियों को हम भूल गए

breakdown

दीयों की लौ में वो सादगी कहाँ गईऊँची इमारतों में वो रोशनी कहाँ गईहाथों की लकीरें अब स्क्रीन पर हैं सिमटीजिंदगी की किताब अब डिजिटल में है पलटी

outro

सांसों की लय में वही पुराना राग हैबुझती नहीं जो कभी, वो भीतर की आग हैवापस लौटेंगे हम अपनी ही मिट्टी की ओरजड़ें ही थामेंगी अब हर एक नया शोरजड़ें ही थामेंगी अब हर एक नया शोर

जड़ों की पुकार

आकाश और माटी

Preview

जड़ों की पुकार by आकाश और माटी | EchoLoRA: Generate a Song with AI