जड़ों की पुकार
आकाश और माटी
Indian Electronic
About
यह ट्रैक पारंपरिक राग आधारित मेलोडी और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक बीट्स का एक अनूठा संगम है। इसमें तबले की जटिल लयबद्ध संरचनाओं को सिंथेसाइज़र के वायुमंडलीय साउंडस्केप के साथ जोड़ा गया है, जो आधुनिकता और परंपरा के बीच के द्वंद्व को दर्शाता है।
Lyrics
मिट्टी की सोंधी खुशबू खो गई है कहींकांच के महलों में रूह सो गई है कहींपुरानी यादों की डोर अब हाथ से छूटीसपनों की नई दुनिया में हर बात है झूठी
सा रे गा म प ध नि सापुरखों की लकीरों का ये कैसा है निशानआधुनिकता की दौड़ में खोया अपना ईमानसा रे गा म प ध नि साधुंधली सी तस्वीरों में अब भी वो साया हैसमय के पहिये ने सबको ही भरमाया है
तारों के जाल में उलझे हैं ये ख्यालबदलते मौसमों का ये कैसा है जंजालमशीनों की धुन में दिल की धड़कन दबीपर जड़ों की गहराई अब भी है यहीं कहीं
धड़कन बढ़ती है, रफ़्तार ये कहती हैपुरानी मिट्टी आज भी सीने में रहती हैबदलाव की लहर में बहते तो हम गएमगर अपनी ही गलियों को हम भूल गए
दीयों की लौ में वो सादगी कहाँ गईऊँची इमारतों में वो रोशनी कहाँ गईहाथों की लकीरें अब स्क्रीन पर हैं सिमटीजिंदगी की किताब अब डिजिटल में है पलटी
सांसों की लय में वही पुराना राग हैबुझती नहीं जो कभी, वो भीतर की आग हैवापस लौटेंगे हम अपनी ही मिट्टी की ओरजड़ें ही थामेंगी अब हर एक नया शोरजड़ें ही थामेंगी अब हर एक नया शोर
जड़ों की पुकार
आकाश और माटी
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