ब्रह्मांडीय चेतना का सार
नक्षत्र ध्वनि
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About
यह ट्रैक पारंपरिक राग-आधारित माधुर्य को जटिल तबला ताल और आधुनिक सिंथेसाइज़र साउंडस्केप के साथ जोड़ता है। इसमें सूक्ष्म माइक्रोटोनल इन्फ्लेक्शंस और परिवेशी बनावट का उपयोग करके एक गहरा ब्रह्मांडीय अनुभव तैयार किया गया है।
Lyrics
शून्य में खोया मेरा मनअनंत का यह गहरा गगननसों में दौड़ती है रोशनीमैं ही हूँ यह पूरी चाँदनी
सा रे गा म प ध नि साखुद में सिमटा, खुद में फैलापलकों के पीछे छिपी है सृष्टिसब कुछ है यहाँ, मेरी ही दृष्टि
धड़कन की लय में ब्रह्मांड का शोरआत्मा उड़ी है, छोड़ के डोरतेजी से बढ़ती, ये कैसी प्यासमिट गया है अब, दूर और पाससब कुछ है एक, सब कुछ है सारउतर रही है मुझमें, ये दिव्य धार
मैं हूँ अनंत, मैं हूँ विस्तारबहता हुआ सा, ये नीला संसारकण-कण में गूँजे, मेरी ही पुकारमैं ही हूँ आदि, मैं ही हूँ पार
समय का पहिया, रुक गया आजन कोई बंधन, न कोई साज़सब कुछ है मौन, सब कुछ है सत्यमैं ही हूँ केंद्र, मैं ही हूँ तथ्य
मैं हूँ अनंत, मैं हूँ विस्तारबहता हुआ सा, ये नीला संसारकण-कण में गूँजे, मेरी ही पुकारमैं ही हूँ आदि, मैं ही हूँ पार
तारों की भाषा, समझ ली मैंनेमिटा दी सारी, दूरियाँ हमनेविलीन हुआ मैं, स्वयं में आजसमाप्त हुआ, यह माया का राज
ब्रह्मांडीय चेतना का सार
नक्षत्र ध्वनि
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