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Duration3:44

परदेसी मन

धूल और राग

Indian Electronic

About

यह ट्रैक पारंपरिक राग आधारित मेलॉडिक फ्रेजिंग और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक साउंडस्केप का एक अनूठा मिलन है। इसमें तबला की जटिल पॉलीरिदम को सिंथेसाइज़र की गहरी परतों के साथ बुना गया है, जो शहरी प्रवास के अकेलेपन को दर्शाता है।

Lyrics

intro

छूटा वो कच्चा आंगनधूल में लिपटी यादेंशहर की चकाचौंध मेंखो गई मेरी रातें

raga-alap

ओ रे मनवाकहाँ चला तू अनजान डगरपग-पग पर है माया का जालसपनों का बोझ लिएचल पड़ा है तू बेहाल

build-up

भीड़ की इस अंधी दौड़ मेंसांसें भी थकने लगी हैंखिड़कियों के पीछे छिपीमेरी आँखें भी अब जलने लगी हैंदूरी बढ़ती जा रही हैमिट्टी के उन निशानों सेरिश्ता टूटता जा रहा हैअपनों के उन अहसानों से

drop

भागती ज़िंदगी, भागते लोगसबको लगा है बेनाम रोगसपनें बेचे, घर छोड़ आएखाली हाथों को हम जोड़ आए

breakdown

क्या यही वो शिखर थाजिसकी तलाश में घर छोड़ा?क्या यही वो सुकून हैजिसके लिए सब कुछ तोड़ा?इमारतों की ऊंचाइयों मेंआसमान कहीं खो गया हैजो कल तक अपना थावो आज पराया हो गया है

drop

भागती ज़िंदगी, भागते लोगसबको लगा है बेनाम रोगसपनें बेचे, घर छोड़ आएखाली हाथों को हम जोड़ आए

outro

याद आती है वो मिट्टी की सोंधी महकयहाँ तो बस धुएं का है बसेरालौट चलूँ क्या उन गलियों मेंजहाँ अभी भी खड़ा है मेरा सवेराखड़ा है मेरा सवेराबस यादों का बसेरा

परदेसी मन

धूल और राग

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परदेसी मन by धूल और राग | EchoLoRA: Generate a Song with AI