परदेसी मन
धूल और राग
Indian Electronic
About
यह ट्रैक पारंपरिक राग आधारित मेलॉडिक फ्रेजिंग और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक साउंडस्केप का एक अनूठा मिलन है। इसमें तबला की जटिल पॉलीरिदम को सिंथेसाइज़र की गहरी परतों के साथ बुना गया है, जो शहरी प्रवास के अकेलेपन को दर्शाता है।
Lyrics
छूटा वो कच्चा आंगनधूल में लिपटी यादेंशहर की चकाचौंध मेंखो गई मेरी रातें
ओ रे मनवाकहाँ चला तू अनजान डगरपग-पग पर है माया का जालसपनों का बोझ लिएचल पड़ा है तू बेहाल
भीड़ की इस अंधी दौड़ मेंसांसें भी थकने लगी हैंखिड़कियों के पीछे छिपीमेरी आँखें भी अब जलने लगी हैंदूरी बढ़ती जा रही हैमिट्टी के उन निशानों सेरिश्ता टूटता जा रहा हैअपनों के उन अहसानों से
भागती ज़िंदगी, भागते लोगसबको लगा है बेनाम रोगसपनें बेचे, घर छोड़ आएखाली हाथों को हम जोड़ आए
क्या यही वो शिखर थाजिसकी तलाश में घर छोड़ा?क्या यही वो सुकून हैजिसके लिए सब कुछ तोड़ा?इमारतों की ऊंचाइयों मेंआसमान कहीं खो गया हैजो कल तक अपना थावो आज पराया हो गया है
भागती ज़िंदगी, भागते लोगसबको लगा है बेनाम रोगसपनें बेचे, घर छोड़ आएखाली हाथों को हम जोड़ आए
याद आती है वो मिट्टी की सोंधी महकयहाँ तो बस धुएं का है बसेरालौट चलूँ क्या उन गलियों मेंजहाँ अभी भी खड़ा है मेरा सवेराखड़ा है मेरा सवेराबस यादों का बसेरा
परदेसी मन
धूल और राग
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