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Duration3:11

میرے خمارو پیامی

استاد فنا رضا قوال

صوفیانہ قوالی

About

یہ قوالی ایک گہرے صوفیانہ سفر کی عکاسی کرتی ہے جس کا آغاز ہارمونیم کی مدھر گونج اور طبلے کی دھیمی تھاپ سے ہوتا ہے۔ جیسے جیسے کلام آگے بڑھتا ہے، آوازوں کا باہمی مکالمہ اور طبلے کی تیز ہوتی تال سامعین کو وجد کی کیفیت میں لے جاتی ہے، جو انا کے خاتمے اور وحدت کے احساس پر منتج ہوتی ہے۔

Lyrics

आते तिस गुनी काफे उईती आलो दहा जा दिली पसकार दिली पिया तो बिया बिया मेरे खुमारो पियामी पियामी पियामी पियामी पियामी पियामी आते संके कारिश्पी कि दियारिश्पी आज का क्यारियार गुचो या कार पियाज बर्जिर गोईश्पू चार बियामी पियामी पियामी पियामी कि दियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारियारि बागता रहामी हर सुयन का बच्चु दिल में ता सचायामी लिख्खी दिवर करान में लगातायामी नम्नमी बागी रहाना मेरी कोई कहानी है बस तेरी जाता को मेरी जन्दकानी है ये भी सारा जामल की जोईसी ओपने अंदर की कोरवा में लगी ये भी सारा जामल की जोईसी ओपने अंदर की कोरवा में लगी फूती खा बोज अपन भूँ पनी है कोई बन्दा नपीरू में नहीं है सब कच्छ फाना सब कच्छ बक्वाई उस्तो नै खोदन थाहाई में मट्रहाओ में मट्रहाओ तीरी जानों गप्पडे रहो आना का सारा का उस्तो ताहो दिकाहा रखने दन्दन छोता बने में ना मिले ना महेबस्तु ही तो हर उकाम हाँई नहीं नहीं नहीं तीरी जानों गप्पडे रहो आना का सारा का उस्तो नै खोदन थाहाई में मट्रहाई में ना मिले ना महेबस्तु ही तो हर उकाम हाँई ना महेबस्तु ही तो हर उकाम हाँई ना महेबस्तु ही तो हर उकाम हाँई ना महेबस्तु ही तो हर उकाम हाँई ना महेबस्तु ही � तो हर उकाम हाँई ना महेबस्तु ही तो हर उकाम हाँई ना महेबस्तु ही

میرے خمارو پیامی

استاد فنا رضا قوال

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میرے خمارو پیامی by استاد فنا رضا قوال | EchoLoRA: Generate a Song with AI