Skip to content
Duration3:34

وصلِ ذات کا سفر

استاد عارفِ ذات قوال

صوفیانہ قوالی

About

یہ قوالی ہارمونیم کی گونج اور طبلے کے روایتی تال کے ساتھ شروع ہوتی ہے، جس میں صوفیانہ کلام کا گہرا اثر ہے۔ آوازوں کے باہمی مکالمے (call-and-response) اور تال کی بتدریج تیزی اسے ایک روحانی وجدانی کیفیت تک پہنچاتی ہے۔

Lyrics

ओहोर बोर एक जिसकी नचार है आप सभा नाम की बदनाम है जब आप रतों की तिमर में हो जाते हैं और नजरे आपकी उलजाते हैं बैठो जरा हमको तो याद कर लो के है ये यकीन तो एक्या करीब आप सभा लाखों में चाहे हमसे लेकिन आप बर रहे होंगे दमसे इसी तो बगते पिर घबरा है वो और भी आपके बात तो है कि आप इधर नहीं पर आप इधर ही है वहाँ कहीं आपको क्या पता के ये रासता जिस रासते को जाने वाले हैं किसी किसने एक दम पोचा है किसी और के माथे पर आप हाजर हो और हाजर रहते हो ये रहता क्या है आपको क्या पता के ये रासता जिस रासते को जाने वाले हैं किसी किसने एक दम पोचा है किसी और के माथे पर आप हाजर हो और हाजर रहते हो ये रहता क्या है आपको क्या पता के ये रासते को जाने वाले हैं ना आप मेरी ना आपकी करीब कोई होश ना आपका भी ये बतानी क्या हो तुम किसी से कहो किस वक्त और कैसे रह जाए आपको क्या पता के ये रासता जिस रासते को जाने वाले हैं किस किसने एक दम पोचा है किसी और के माथे पर आप हाजर हो और हाजर रहते हो ये रहता क्या है आप चले गए आप जते गए आप आए गए आप जते गए आप आए गए आप जते गए आप आए गए आप जते गए आप जते गए आप जते गए आप जते गए

وصلِ ذات کا سفر

استاد عارفِ ذات قوال

Preview

وصلِ ذات کا سفر by استاد عارفِ ذات قوال | EchoLoRA: Generate a Song with AI