تری صفائی کا کمال
استاد ربوبندِ نور قوال
صوفیانہ قوالی
About
ایک روایتی صوفیانہ قوالی جس میں ہارمونیم کی گونج اور طبلے کی تال کا حسین امتزاج ہے۔ گیت کا آغاز دھیمی لے سے ہوتا ہے جو آہستہ آہستہ شدت اختیار کرتے ہوئے ایک وجدانی کیفیت تک پہنچتا ہے، جس میں صوتی مکالمہ اور تال کی تیزی نمایاں ہے۔
Lyrics
यो तिरिकरिये इरिका किया के नाजरे जरे मी जल्वतिरा हर सुनूर का बसिराहक। हर भूल की पटी मी लखिये को नूखी कहानी है सूरचिके कर्नूमी पीराही अक्से नूर जल्लकता है रातके। पुनदे नाजरे तीरी तग्लीह का हसन न जोबे मिसोल है जस तरफ की खोन तीरे हुने का ही सवाल है खाल के कल तो ही तो तीराही कमाल है जद तीरी सफात तीरी। कच्रे को समंदर बनाना तीराही कमाल है जद तीरी सफात तीरी। कच्रे को समंदर बनाना तीरी कमाल है जद तीरी सफात तीरी। कच्रे को समंदर बनाना तीरी कमाल है जद तीरी। कच्रे को समंदर बनाना तीरी कमाल है जद तीरी। कच्रे को समंदर बनाना तीरी कमाल है जद तीरी।
تری صفائی کا کمال
استاد ربوبندِ نور قوال
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