मुखौटों का दौर
आर्यन सागर
Bollywood
About
यह गीत एक गहन सामाजिक ड्रामा है जिसमें तबला और ढोलक की पारंपरिक थाप के साथ आधुनिक सिंथेसाइज़र और स्ट्रिंग ऑर्केस्ट्रेशन का सुंदर मिश्रण है। इसमें एक भावुक पुरुष स्वर है जो समाज के दोहरे चेहरों और रिश्तों के खोखलेपन पर कटाक्ष करता है।
Lyrics
ओवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोवोव पर मुख़ोटों की कतारे है पूछता ये दिल क्या सच और क्या जूठ है बिर में खड़ा इंसन खुल से ही रूठा है कलम से लिखी तक दिस्याई में खो गई अपनों की महफिल में रस्ट पड़ी हो गई दिवारों के भी कान है खामोश यहां सब लोगनों की नसरों का � लगता है ये रूप सच्चाई की राहों में बिचाओ ना हस पे हुए चरों में चुप कर है रोना ये कैसा है दोर ये कैसी है रीत अपनों के ही शोर में खोई अपनी प्रीत अच्छाई का आईना यहां क्यों दुढ़लाता लगता है रिष्टों के इस चाल में हर कोई क्यों ढगता है ये कैसा है दोर ये कैसा है दोर दिखा बे कि दिनिया में रस्मों का है बोल भारी सासों की दोर पर जूठी है ये दुनियादारी किसी की मजबूरी तो किसी का है ये खिल बदले हुए जमाने में दिल हो गए है जिल सच बोलने की हिमत अब दम तोड़ जाती है गलत के आगे जुक कर रुहार जाती है जनजीरे ये रित की तोड़ना है जरूरी अदूरी सी ख्वाईशों को चोड़ना है जरूरी कब तक मुखाउटों के पीछे सच को छुपाओगे खुद को खो कर क्या तुम कल को पाओगे ये कैसा है दोर ये कैसी है रीत अपनों के ही शोर में खोई अपनी प्रीत अच्छाई का आईना क्यों दुन्धलासा लगता है रिष्टों के इस चाल में हर कोई क्यों ठगता है आईना अब बोलते सच का साद थेस बिड में भी कोई अपना हाथ दे ओ अपना हाथ दे सब सच हो जाए सब सच हो जाए सब सच हो जाए हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ ह
मुखौटों का दौर
आर्यन सागर
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