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Duration3:16

चेहरों के नकाब

सचिन गुप्ता

Bollywood

About

एक भावुक बॉलीवुड ड्रामा ट्रैक जिसमें तबला और सारंगी का गहरा मेल है, जो आधुनिक जीवन के खोखलेपन को दर्शाता है। इसमें आर्केस्ट्रा स्ट्रिंग्स और एक मेलोडिक प्लेबैक सिंगिंग शैली का उपयोग किया गया है जो सामाजिक यथार्थवाद को उजागर करती है।

Lyrics

दुआओं के शहर में खामोश यां बिची है सच की तलाश में पलके न जुगी है काँच के इंधरों में रिष्टों की डोर उलजी है दिखावे की इस चमक में सच्चाई कहीं दब गई है सब की अपनी अपनी नजरिया सब की अपनी अपनी चाल है अपनों के बीच रहकर भी जंगी सा हर हाल है मुह पर मीठी बाते पीठ पीछे धंजर हैं कैसे निभाएं वादें जब हर तरफ बवंडर हैं ये कैसा खेल है दुनिया का चेहरों पे चेहरे चड़े हैं सपनों की शहर की गलियों में हम तनहा केले खड़े हैं सच की आवाज दब गई है जूत के शोर में कहीं खाबों के इस मेले में अब हम अपने रहे नहीं उम्मीदों की बाजारी में वफा का मूल क्या होगा जो कल तक साथ चलते थे वो कल फिर कौन होगा दिवारें उंची हो गई हैं दिलों के धर्मियान अब कौन समझेगा इस खामोशी को कौन बाटेगा ये गम अब आइना भी अब गतराता है खुद से नजरे मिलाने में इतने परस कुजर गए खुद को ही ढूंढ पाने में ये कैसा खेल है दुनिया का चेहरों पे चेहरे चड़े हैं सपनों के शहर की गलियों में हम तनहा केले घड़े हैं सच की आवाज दब गए है छूट के शोर में कहीं खाबों के इसमें ले दे अब हम अपने रहे नहीं सब ढूंढ है सब ढूंढ है

चेहरों के नकाब

सचिन गुप्ता

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