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रस्मों की जंजीर
Duration3:23

रस्मों की जंजीर

अर्णव सेन

Bollywood

About

यह गीत एक भावनात्मक सामाजिक ड्रामा है जिसमें तबले की गहरी थाप और करुण वायलिन धुनों का अद्भुत मेल है। इसमें आधुनिक सिंथेसाइज़र के साथ शास्त्रीय राग-आधारित स्वर लहरियाँ हैं जो पारिवारिक अलगाव के दर्द को गहराई से दर्शाती हैं।

Lyrics

ये गैसी उजन्ने जो अपनों के बीची बनती है दिवारे उठी है इस तो के नाम पर और हम खड़े है तमाशा बने खर की तहलीच पर खड़िये या मोशी पूछती है क्या खोया और क्या पाया वड़परन की चादर में लिपटे ये चेरे अंदर से सबने अपना सच छुपाया एक दूजे से बाट करने में तर कैसा जब लोग के रिष्टे ही हो गए पराये आईना भी अब तो मुफेर लेता है जब सच बोलने की हिम्मत हार जाते हैं मर्यादा की पेड़ियां पैरों में भाड़ी हम अपनों के बीच भी तनहां मर जाते हैं ये कैसी मोकी जंजी है जो अपनों की खुशी में भी तकलीफ देती है दिखावे की दुनिया में खो गया घर जहां हर शक सपनी ही जीट ढूड़ती है विखरे है सपने विखरा है आशियाना अब तो बस खामोशी का ही शोर बाकी है मेज पर रखे वो पुराने खट और तस्वीरें कवाही दे रहे हैं उस हस्ते बच्चपन की आज उसी जग पर सन्ना टापसरा है की मत चुका रहे हैं हम बड़ों के हंकार की क्या सच में ये रूत बाही सब कुछ है की प्यार से बड़ी कोई दिवार नहीं होती ये किसी को घबर नहीं जिन्दगी बहुत चुटी है साहब नफरत करने की यहां उम्र नहीं एक बार फिर से हाथ बड़ा कर तो देखो शायब पिगल चाए ये जमी हुई बर्व ये कैसी रोगी जंजी है जो अपनों की खुशी में भी तकलीफ देती है दिखावे की दुनिया में खो गया घर जहां हर शक सपनी ही चीट ढूडती है बिखरे है सपनी बिखरा है आशियाना अब तो बस खामोशी का ही शोर बाकी है आशियाना अब तो बस खामोशी का ही शोर बाकी है आशियाना बस एक बार प्यार का दीबक जला लो

रस्मों की जंजीर

अर्णव सेन

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