नकाब के पीछे
अनुराग दास
Bollywood
About
यह गीत एक गहरा सामाजिक ड्रामा है जिसमें तबला और ढोलक की पारंपरिक थाप के साथ स्ट्रिंग ऑर्केस्ट्रा का अद्भुत मेल है। इसमें राग-आधारित धुनें और भावुक पुरुष स्वर हैं जो आधुनिक दुनिया के दिखावे और रिश्तों के खोखलेपन को दर्शाते हैं।
Lyrics
दुनिया की भीड में खुद को खोया है रिष्टों के धागों में दिल ये रोया है कांच के इन घरों में सच का आइना गुंदला है अपनों के हिसाय में आज हर इंसान बदला है बाते मीठी उपर से अंदर जहर का प्याला है किसने सच पो दफन किया और जूट का जाल फैला है मुस्कुराहट के पीछे चिपे का रिखाओ है भीड में खड़ा होकर तनाई का पढ़ाओ है सबके हाथों में नकाप चेहरे पे नकाप हैं आजकल रिष्टों के भी अजीब से हिसाब है ये कैसी चाल है ये कैसा दोडाया है अपनों के बीच भी फसलों का शोराया है दिखाओ इस दुनियां में वपा मरसी गई है सकी रावर चलने की हिम्मत ही दरसी गई है मर्यादा की बेडियों में अर्मान दम तोड़ते हैं जोड़ने की चाबे हम रिष्टे खुद ही तोड़ते हैं उंगलियां उठती हैं हर तरफ खमोशी का है बहरा किसकी गलती है यहाँ और कौन है यहाँ गहरा आइना देखना सबको गलता है सरच का सूरज भी यहाँ देर से निकलता है बदलते हुए मौसम की तरह लोग बदल जाते हैं जजबातों को अपनी ही जलाते हैं आग में जलाते हैं ये कैसी चाल है ये कैसा दोर आया है अपनों के बीच भी फसलों का शुरू शो राया है दिखावे किस दुनिया में परफार्मर सी गई है सकी रापर चलने की इमात ही डर सी गई है बस एक उम्मीद है कल फिर सवेरा होगा जूट के इस अंधेरे का अंत गहरा होगा खुड़ को फिर से जोड़ना है सच के ही साथ चलना है जो धुआँ है चट जाएगा फिर से हमें संभलना है हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ ह हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ ह
नकाब के पीछे
अनुराग दास
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