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Duration3:48

कुर्सी का खेल

शमशान सुल्तान

देसी हिप हॉप

About

यह ट्रैक भारी 808 बेस और जटिल ढोलक के तालमेल के साथ एक गहरा राजनीतिक संदेश देता है। इसमें आधुनिक ट्रैप बीट्स के साथ देसी वाद्य यंत्रों का मिश्रण है, जो सामाजिक व्यवस्था पर तीखा प्रहार करता है।

Lyrics

पहुचा जो नाटक वो नहीं रहना रहेगी हेरो तो आजा अपने निर्मानों की पटगतवार थेके करते हूं शुक्र फूट के डालों पर फूटते हूं हाथ गया जो बांधे उसे खुटते निकल जा बागे ये शिक्षा शक्ती ये शिक्षा शक्ती ये शिक्षा शक्ती है गर्जनी का अपनों की कलकी की राह देना हरे खाली हाथ देंगे अपनी बाहे पर आजोंगे उसे अपनी परती की परचा निकलेगा हर रात में गर्जनी है कैसे हाथ उठाओंगी बुद्धी की कैसी सुराई निकल के उसका साथ जाए शहर और यारे बाते स्वादे प्रेच राखे अंधा और दोस्पर्दी यारों की निर्मानों पे पैने उड़ाई लेंगे ये शाहिश बोलते है चिरियू से कैसा दाना दोटे वो तू नहीं वजोता दूर से उसका साथ ना दोटे अपनी परके तो डोसी में उसे परस्तान ना दोटे परती परकाश ना दोटे इधरा ना दोटे इधरा ना दोटे वो तूर से आए बाते उसे परस्तान ना दोटे अपनी परके तो डोसी में उसे परस्तान ना दोटे परती परकाश ना दोटे इधरा ना दोटे इधरा ना दोटे वो तूर से आए बाते उसे परस्तान ना दोटे अपनी परके तो डोसी में उसे परस्तान ना दोटे परती परकाश ना दोटे इधरा ना दोटे इधरा ना दोटे इधरा ना दोटे वो तूर से आए बाते उसे परस्तान ना दोटे इधरा ना दोटे अपनी परके तो डोसी में उसे परस्तान ना दोटे परती परकाश ना दोटे इधरा ना दोटे वो तूर से आए बाते उसे परस्तान ना दोटे उसे परस्तान ना दोटे उसे परस्तान ना दोटे

कुर्सी का खेल

शमशान सुल्तान

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