सत्ता का जहर
सच तस्कर
देसी हिप हॉप
About
यह ट्रैक भारी 808 सब-बास और पारंपरिक ढोलक की थाप का एक शक्तिशाली मिश्रण है, जो देसी हिप हॉप के सामाजिक सरोकारों को दर्शाता है। इसमें बहुभाषी प्रवाह और तीखे शब्दों का प्रयोग किया गया है जो व्यवस्था पर सीधा प्रहार करते हैं।
Lyrics
सड़कों पे धुआं है, आँखों में खौफकिताबों के पन्ने हैं, हाथों में शौकसच बोलने का अब कोई रास्ता नहींदबे हुए लफ्जों का कोई वास्ता नहीं
कुर्सियों पे बैठे हुए ये सौदागरजनता के आंसुओं पे इनका घरकानून की गलियों में अंधेरा घनाये सच का गला घोंटते हैं, तना तनानोटों की गर्मी में पिघलते ईमानगरीब की थाली में बस सूखी पहचानमीडिया के कैमरों में झूठ का जालये पूछें नहीं, बस बिछाते हैं कालमेरे शहर की रूह को बेचते ये लोगइनकी हवस ही है सबसे बड़ा रोग
दीवारों के कान हैं, जुबां पे तालेये अपने ही घर में, खुद को पालेंसवालों के तीरों से डरते हैं येअपनी ही साख पे मरते हैं ये
ये कुर्सी का खेल है, ये सत्ता का जहरखून से लिखी है इबारत, हर एक शहरवो ऊपर से मुस्कुराते, नीचे बिछाते जालहम आम आदमी, बस पूछते अपना हालये कुर्सी का खेल है, ये सत्ता का जहरबदलाव की आंधी में, कांपेगा हर घर
दावों की बारिश में भीगता गरीबइनकी नीयत में बस एक ही फरेबफर्श से अर्श तक का सफर है इनकापर खून पसीने से भीगा है मेराये तकरीरें करते, ये वादे सुनातेमहंगाई की आग में हमें झुलसातेमेरे अल्फाज ही मेरा हथियार हैंइनके चेहरे पे लगा नकाब, बेकार हैमैं गूंजता रहूंगा हर उस गली मेंजहां दम घुटता है इनकी भली-बुरी दलीलों में
इतिहास की स्याही अब बदल रही हैजमीन के अंदर एक आग जल रही हैन डरेंगे अब, न झुकेंगे हमइनके जुल्मों के साये को मिटाएंगे हमकल का सूरज अब हमारा होगासच्चाई का परचम, सबसे प्यारा होगा
ये कुर्सी का खेल है, ये सत्ता का जहरखून से लिखी है इबारत, हर एक शहरवो ऊपर से मुस्कुराते, नीचे बिछाते जालहम आम आदमी, बस पूछते अपना हालये कुर्सी का खेल है, ये सत्ता का जहरबदलाव की आंधी में, कांपेगा हर घर
कांपेगा हर घर, जब सच बोलेगा हर सरये सत्ता का जहर, अब नहीं चलेगा घर-घरजाग उठो अब, समय का है ये इशाराबदलाव की राह पे, हम सब का है नज़ारान कोई राजा, न कोई प्रजा का गुलामबस इंसानियत का, सबसे ऊंचा नाम
सत्ता का जहर
सच तस्कर
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