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Duration3:34

खाली पेट की आग

भूखा शेर

देसी हिप हॉप

About

यह ट्रैक भारी 808 बेस और पारंपरिक ढोलक की थाप के साथ एक शक्तिशाली राजनीतिक बयान है। इसमें बहुभाषी प्रवाह और सामाजिक अन्याय के खिलाफ तीखे बोल शामिल हैं जो देसी हिप हॉप की जड़ों को दर्शाते हैं।

Lyrics

लाल बत्तियों के पीछे जिपे काले चेहरे स्वेद काग जोंपर जूटे सुनेरे सवेरे सुनू ये शहर अब जाग रहा है इतिहास नहीं हम अपना कल लिख रहे हैं कुर्सियों की जंग में जंता का हाल गुम है वादों की गठरी में उम्मीदों का दंब धूरता है तुमने बनाये दे हमने सहा है हर एक सिक्कम तुम्हारी कलम की साई में हमारा ही तो है कम सडकों पर दोड़ती गाड़ियां और खाली पैट की आग तुम्हेलों में सो रहे हम काट रहे है ये बाक तुम्हारा तुमका हाजाल अब और नहीं बुनेगा सैका शोर हर कली का बच्चा सुनेगा दिवारों पर लिखे ना मिटाने से क्या होगा जब हर दिल में उबता हेका एक नया समारी खिलगाना है लेकिन खिलाडी नए है तुम्हारी चारों के आगे हम अब और नहीं चुके हैं ये कुर्सी का खिल नहीं ये हग की लड़ाई है तुमने जो आग लगाई वही अब तुम्हारी तबाही अस्चाई की रापर अब करवान चल बड़ा है हम अदमी का चेजबा आज सबसे बड़ा है भाषनों की भीड में उक्सदों का पता नहीं तुम्हारी बन मुठीयों में कोई भी खता नहीं सिर्फ नाम बतलते हो काम वही तूरा ना है जनता के पैसों का तुम्हें ही तो खजाना है हम वो आईना है जिसमें तुम फुद को देखोगे कल तक जो हसते थे आज महीं सब छे लोगे नारे नहीं अब काम का हिसाब मंगा जाएगा हर एक आसुका अब जवाब मंगा जाएगा काग के इन टुकडों पर हमारी किस्मत नहीं लिखी ये जो तुमने रची है ये साजिशें अब नहीं टिकी मिट्टी से रुडे है हम जड़ों को तुम क्या गाटोगे ही बुने जाल में तुम खुद ही तो सिंटोगे ये कुर्सी का केल नहीं ये हक की लड़ाई है तुमने जो आग लगाई वाई अब तुम्हारी तबाही एसचाई की रापर अब कारवान चल पड़ा है हम अदमी का चचबा आज सबसे बड़ा है सूरज धल रहा है लेकिन रोशनी अभी बाकी है तुम्हारी सत्ता की उम्र देखो समझो ये वक्त अब हमारा है कल की सुबह में सिर्फ सच काई नजारा ऐसे की जीत होगी कल की सुबह में सच काई नजारा

खाली पेट की आग

भूखा शेर

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खाली पेट की आग by भूखा शेर | EchoLoRA: Generate a Song with AI