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Duration3:11

सियासत का दलदल

स्याही शहंशाह

देसी हिप हॉप

About

यह ट्रैक भारी 808 सब-बास और पारंपरिक ढोलक की थाप का एक शक्तिशाली मिश्रण है। इसमें सामाजिक व्यवस्था पर तीखे प्रहार के साथ बहुभाषी रैप प्रवाह का उपयोग किया गया है, जो देसी हिप हॉप की जड़ों को आधुनिक ट्रैप ध्वनि के साथ जोड़ता है।

Lyrics

बोल जी अब सोंती रहां दे हो बाहर शहर की सड़कों पे स्याही का ये खेल पुराना कुरसियों बीचे छिपा है असली निशाना सुनो ये गलियों की भूँज है कोई खामोशी नहीं जो सच बोले उसकी कोई राजी कुशी नहीं शहर की सड़कों पे तूटे हुए फुटपाट का हिसाब मांगूं बोले कमरों में बलते हुए इस खवाब का जवाम गूं तुमने वादों की माला को खूब गले में डाली है पर जनता की थाली में बस खाली पन की लाली है वो गलम की ताके तुबेलियों में चेकड़ते रहे हम हकीकत की आग में खुद को ही रखे तेरे तुमने नाम बदले तुमने काम बढले बदले ना हाला तवी पुरानी चाले वही जूटी और कड़वी बात ये कुरसी का खेल है ये हवान सब सुनते है कि कोप से अब नई गांतियां बुलती है ये कुरसी का खेल है यहां मुहरे बढले जाते हैं इस बुलने बलों के नारद किये जाते हैं सियासत के इस दलदल में गमलने का डावा है पर सची यह है कि यहां हर कड़म पे चलावा है मंचो बेदा हाडते हो जैसे शेर की सवारी हो पर अंदर से देखो तो बस एक ओकली तैयारी हो तुम दे धर्म की आडम में लकी बढ़की रे बढ़कींच दिम भाई को बैसे लड़ने की नहीं रीब सींच तु गरीब का चूला जो आज भी बुज़ हुआ है तुम्हारा में हिच्चा जा हुआ है आंकों पे पटी बांदे पे पटी बांदे तुम याएं का तराजो दे हो असली गुनहकार को छूड़ तुम बेगुना हो को चकटे हो वत का पहिया खूमेगा हिसाब हर एक का होगा जूट का ये मुखोटा एक दिन खुद ही रोयदान कोई बड़ा रसू ने कोई उची जात बचेगी जब जनता जागेगी तो बस इनसाफ की बात बचेगी ये पुर्शी का खेल है ये हमारे सब सुनते है कि खुब से अब नहीं कहते है ये पुर्शी का खेल है यहां मुहरे बदले जाते है इस बोलने वालों के नाहां रद किये जाते है सियास के इस दलदल में गमलने का दावा है पर सची यह है कि यहां हर कदम पे एक चलावा है ये मुशान अब हर हाथ में होगी

सियासत का दलदल

स्याही शहंशाह

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