نورِ مجسم
غلاماںِ نور
صوفیانہ کلام
About
یہ کلام ایک گہری روحانی کیفیت کا حامل ہے جس میں ہارمونیم کی مدھر گونج اور طبلہ کے روایتی تالوں کا حسین امتزاج ہے۔ گلوکار کی جذباتی اور پرسوز آواز، جو کہ صوفیانہ روایت کے عین مطابق ہے، سامعین کو ایک مراقبہ جیسی کیفیت میں لے جاتی ہے۔
Lyrics
नोरे मजसम् शाहे अम् तिरी सन्नासमे खोए हिन्दे हजूर पे आके अम् सबकच्छ बूलके रूए ही तीरी एक नजर के ताल भी हम खाक नशीन बेहाल होए तीरी राह्मत की बरसात होई तु सोखे पते नहाल होए तीरे नखशे कदम की खुश्बुसे ये दुनिया महक्ती रहती है तीरे नाम की तस्वी भर सौनस धर्डकती रहती है या रसूल ल्ला या हपिब ल्ला तीरी आजमत को सलाम तीरे दर्का सुवारी होगी तीरा हिली तहो नाम तीरी मुहपत थी तो है हासल तीरी नीरे जनूम के सद्गे में रोशन है ये सारा जमीर कारी रातूं के अन्धिरूं भी तीरा जक्रही मीरा चिराग बना तीरे दर्की चो खट चूंके तो मीरा हर अक्टाग मता तीरी खुल के आजिम के चर्चही जरे जरे की सबानों पर तीरा साये बन के रहती ही हम तीरे दिवानों पर या रसुलिल्ला या हबिबिल्ला तीरी अजमत को सलाम तीरे दर्का सवारे वो भी तीरा ही लेता हो नाम तीरी मुहपती तो है हासल तीरी नीरे जनूम के सद्गे में रोशन है ये सारा जमे आये कौश के मधीरे की गली वो मी मेरी रूख का बसीरे रोजे की अंजार्यों के पास मेरा आखरी सो वीरा होते जसा न कोई तहा न कोई है तज परला खोंड रूद और सलाम तीरे तो मिलती है मुझ जी से गुणेगार वु आराम रूया मुस्तफी या मुष्टवी तीरा ही नाम से चाहे तीरे दर का फखीर हुमी तीरे ही दर पे बचा है सलो हो तजबर सलम हो तजबर तीरे ही ये सारा आलम जहाँ तो मिलती है मुझ जी से गुणेगार वु आराम तीरे ही दर पे बचा है सलो हो तजबर सलम हो तजबर सलम हो
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