تیری رحمت کا ٹھکانہ
سراج رحمانی
Hamd
About
یہ حمد ایک پرسکون اور روحانی تجربہ ہے جس میں ہارمونیم کی دلکش دھن اور طبلہ کی روایتی تھاپ کو مرکزی حیثیت حاصل ہے۔ آواز کو بہت نمایاں اور صاف رکھا گیا ہے تاکہ حمد کے الفاظ کی گہرائی اور اللہ کی رحمت کے احساس کو پوری طرح محسوس کیا جا سکے۔
Lyrics
तेरे करम के बारुशिन मेरे दिल को सिराग कर गे नीन। तु बटक मुसाफ़ जहाँ तीरी रह्मत ने मुझे रा दिखा दी। मेरी खताओं का बूच जब हद से बूध गिया तीरी अता का दर्या मेरी। तरफ माईजा मेरी तहाँ उरके बना दिया तुने मेरी हर अक्ल जनकू से खून में बदल दिया। आये मेरे रब्ब तीरी रह्म का कोई ती तकान नहीं चजा सेवज चसे बही मी गरता रहा। तुने सिन्दभार लिया मचे तीरे सवा मिरा कोई तहकान नहीं। धीरी रातों में तीरी आद का दिया जलता है मेरी रूख को तीरे नाम से ही खरार मिलता है। धीरी रातों में तीरी आद का दिया जलता है मेरी खरार मिलता है। आये मेरे रब्ब तीरी रह्म का कोई ती तकान नहीं चजा सेवज चसे बही मी गरता रहा। तुने सिन्दभार लिया मचे तीरे सवा मिरा कोई तहकान नहीं। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा। ख़क से बही मी गरता रहा।
تیری رحمت کا ٹھکانہ
سراج رحمانی
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