سجدوں کی تنہائی
قندیل بصیر
Hamd
About
یہ حمد ایک پرسکون اور روحانی تجربہ ہے جس میں ہارمونیم کی گہری دھن اور طبلہ کی نپی تلی تال کا امتزاج ہے۔ آواز کو مرکزی حیثیت دی گئی ہے تاکہ کلام کی پاکیزگی اور اللہ کی ذات سے لگاؤ کو پوری طرح محسوس کیا جا سکے۔
Lyrics
एक पूर्दों मुझ्जन कबाबा के दर का धाम जननत कबाबा मुबारक हो सिध्धि विनाया कौसली का प्रण जननत कबाबा मुबारक हो मुखर से पहुचाए जिसका शनोमी का दिन जिसका महराष्ट्र पुजावे जिसका हमसोडी का दिन जिसका मारे नाध की गली गली में वो तलवार उठाई थी शिवजी की अपनी कमर में वो शत्री उठाई थी लेके धरम कम लहरों में अपनी लहरे लगाई थी मणी से करना वो वाली थी किशन पति नियम बाबा कशी का मणी से करना वो वाली थी किशन पति नियम बाबा कशी का लेहनत कतरा वो वाली थी बाबा भिमराओ का सबके ही दिल में वो सबका वजूर है वो सबका वकिर है वो है सबका विर वो धरम जहां है वहां भिमराओ का धरम जहां है वहां भिमराओ का मुझे लगता है बाबा बाबा मुझे लगता है मुझे लगता है बाबा बाबा मुझे लगता है मुझे लगता है बाबा बाबा मुझे लगता है मुझे लगता है बाबा बाबा मुझे लगता है यही मेरी पुकार याद रखता ना बाबा बाबा मुझे लगता है मुझे लगता है बाबा बाबा मुझे लगता है मुझे लगता है बाबा बाबा मुझे लगता है
سجدوں کی تنہائی
قندیل بصیر
Preview