مالکِ کل
روحِ عرفان
Hamd
About
ایک روحانی حمد جس میں ہارمونیم کی پرسوز دھن اور طبلہ کی روایتی تھاپ کا حسین امتزاج ہے۔ آواز کا مرکزی کردار اسے ایک گہری، مراقبہ جیسی کیفیت عطا کرتا ہے جو سامع کو سکون اور خشوع و خضوع کی طرف لے جاتی ہے۔
Lyrics
ये रे रे रे रे रे रे ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ले ना तकीरूंगा तो तो ही है सब से दूर जमीग की वासा तुमें तीरा ही ना उरखा है फुलक की बुलंदियों पे तीरी ही नशानिया इन समंदर की लहरों में तीरी ही तस्पी है वाओं के जूँकों में तीरी ही खानिया हिन्ने मौलके खुल ए खालके दो जहां तीरी असमत का कोई नहीं ठहकान तीरे ही दर से मलती है सब कुप ना तीरे ही नाम पह मेरा दिल दिमाने इन धिरू में भी तो ही रोशनी का सफर है हर एक धरडा कुण में तीरा ही सिखर जमील है तीरी रजा के बनापत भी हलता नहीं तो ही हयात है तो ही मेरी सबसे बुदील है मौलके खुल ए खालके दो जहां तीरी असमत का कोई नहीं तहकान तीरे ही दर से मलती है सब कुप ना तीरे ही नाम पह मेरा दिल दिमाने मेरी खता को तो अपनी राहमत से तीरी असमत का कोई नहीं मौलके खुल ए खालके दो जहां तीरी असमत का कोई नहीं तहकान तीरे ही दर से मलती है सब कुप ना तीरे ही नाम पह मेरा दिल दिमाने तीरी असमत का कोई नहीं मौलके खुल ए खालके दो जहां तीरी असमत का कोई नहीं तहकान तीरे ही दर से मलती है सब कुप ना तीरे ही नाम पह मेरा दिल दिवाने
مالکِ کل
روحِ عرفان
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