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Duration2:55

تڑپِ بندگی

مرشد رحیم

Hamd

About

یہ حمد ایک روحانی سفر ہے جس میں ہارمونیم کی پرسوز دھن اور طبلے کی دھیمی تھاپ کو مرکزی حیثیت حاصل ہے۔ اس کا ووکل سینٹرک مکس سامعین کو ایک پرسکون اور مراقبہ جیسی کیفیت میں لے جاتا ہے، جو اللہ کی محبت اور طلب میں ڈوبی ہوئی ہے۔

Lyrics

अन्धिरों में बटकता हूँ कोई रस्ता नहीं मिल मलता तीरे जिक्र के बन दिल को कोई सद्गा नहीं मलता मीं मट्टी का एक जर तो ही काइनाथ सारा है तीरे बन जिन्दगी मेरी बटकता अक अशार है है मेरे रब मेरी तड़कू तो जानता है मेरी रूँ की पयास को बस तो ही बहता है मीं दूरों खुद ऐसे तज से मलने की तड़प है तीरी अनुयत की मजबू हर पेला जुरूरत है कभी सजदू मीं रोया हूँ कभी तनहाई मीं मन घात चे मिन्ने खुद कोही दया गागान कोई दोसर अगर है न कोई और धकान है तीरे हुजूर मीं ही तू मजे सर को जखाना है है मेरे रब मेरी तड़कू तो जानता है मेरी रूँ की पयास को बस तो ही बहता है मीं दूरों खुद से तज से मलने की तरद पर तीरी अनुयत की मज़ को हर पेल जुरूरत है तीरे रह्माद की पर तारिश मेरे दिल को बर को जल मुझे को मेरी दुनिया सुनूर जाये बस तीरा है नाम बागी मेरी सौनसों की लहरों में तीरा ही अक्सफाल मीं अपनी अनुंखों मीं

تڑپِ بندگی

مرشد رحیم

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تڑپِ بندگی by مرشد رحیم | EchoLoRA: Generate a Song with AI