फर्ज का धागा
युवराज पंडित
बॉलीवुड
About
एक भावुक बॉलीवुड गीत जो पिता और पुत्र के अटूट बंधन को दर्शाता है। इसमें तबला और हारमोनियम के साथ एक विस्तृत ऑर्केस्ट्रा व्यवस्था है, जो एक भावनात्मक चरमोत्कर्ष की ओर बढ़ती है।
Lyrics
पिताए की अंगलियों को भागे चलन नशिकार था मैनन के उनी कंधों को अपने नाम करना हुँ मैन गर की ये दिमारे घावो हमें मेरे हर एक मुस्कन किस पनों के छूटे से अनंग में नहीं नहीं नहीं नीवे हुए उस्थान काली बनके एक जोग नाके पढ़के हर एक जोग मागे पढ़के हर एक जोग हवाओं में भुल गई खुश्बू उन वादों की जो निभाए थे पनों की खाटिर मैंने अपने नी अर्मान छुपाए थे ये फर्ज का धागा है जो दिल से दिल को जुड़ता है अपनों के लिए जीना ही तो किस्मत को मुड़ता है कोई शिकायत है ना कोई अब मलाल है मेरे घर की खुशी मही मेरा बड़ा कमाल है कभी कभी ठक जाता है मन प्राइब दली सी लिए लगती हैं पर अपनों की दुआएं ही रास्तों में सिदारे रखती हैं गूम के रिष्टे का ये कर्ज मैं कैसे चुका बाऊंगा बस न जान लूँगी मैं अनका साया बन जाओंगा ये फर्ज का धागा है जो दिल से दिल को जुड़ता है अपनों के लिए जीना ही तो किसमत को मुड़ता है कोई शिकायत है न कोई अब मलाल है मेरे घर की खुशी में ही मेरा बड़ा कमाल है ये फर्ज का धागा है जो दिल से दिल को जुड़ता है अपनों के लिए जीना ही तो किसमत को मुड़ता है कोई शिकायत है न कोई अब मलाल है मेरे घर की खुशी में ही मेरा बड़ा कमाल है
फर्ज का धागा
युवराज पंडित
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