इंसाफ का परचम
आज़ाद आवाज़
बॉलीवुड
About
यह गीत एक शक्तिशाली बॉलीवुड एंथम है जो सामाजिक न्याय के विषय पर आधारित है। इसमें तबला और ढोलक की तीव्र लय के साथ एक भव्य ऑर्केस्ट्रा और आधुनिक सिंथेसाइज़र का मिश्रण है, जो अंत में एक भावनात्मक चरमोत्कर्ष तक पहुँचता है।
Lyrics
अधो की रातों की चंजिरें पिखलने वाली हैं नई सुबह की आहटे अब संभलने वाली हैं जो डबाया गया गया था वो अब बोलेगा इसाफ का सूरज हर दिल में डोलेगा पत्थरों के शहर में खामोशियां पड़ी हैं सडकों पर आज भी कतारें खड़ी हैं किसी की महनत का हकोई और खा गया ग्रीब कानिवाला अंधेरे में खोया मगर अब राक से जिंगारी निकलेगी तबी हुई आवाज अब राहें बढ़ लेगी सुनो जमीन की ये बुकार क्या कहती है हक की लड़ाई अब रभों में पहती है न जुकना है न रुकना है अब आगे बढ़ना है अनियाय के इसमल को जड़ से उखाड़ना है उठो की अब इनसाफ का पर्चम लहराना है जुनम के अंधेरों को अब दूर भगाना है सबको बराब का ये आसमान चाहिए हमें तो बस अपना ये सम्माच चाहिए उठो की अब इनसाफ का पर्चम लहराना है कलम की दागत से हम सच लिखें सारे भेदभाव के पंडे मिटाएंगे जो उंच नीच की दिवारें घड़ी है हूँ पर हम उम्मीद की इबारत लेके दिलाब की हाई ये लड़ाई किसी एक की नहीं पुड़े जहां की है इंकलब जो उठा है हर उस इंसान की है जो जहता रहा जो जुगता रहा वो अपनी हकीकत को खुद कर देगा उठो की अब इंसाफ का परचम लहराना है जुल्म के अंधेरों को अब दूर भगाना है सब को बराब का ये आसमान चाहिए हमें को बस अपना ये सम्मान चाहिए उठो की अब इंसाफ का परचम लहराना है उठो की अब इंसाफ का परचम लहराना है जुल्म के अंधेरों को अब दूर भगाना है सब को बराब का ये आसमान चाहिए हमें को बस अपना ये सम्मान चाहिए नया सवरा आ गया हक हमारा मिल गया इंसाफ का हर भूल अब खिल गया अब खिल गया इंसाफ का सूरज अब खिल गया
इंसाफ का परचम
आज़ाद आवाज़
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