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Duration3:49

शून्य की ओर

निर्गुण स्वर संगम

Devotional

About

यह रचना पारंपरिक हारमोनियम और तबले की थाप पर आधारित एक शांत भक्ति गीत है, जो अहंकार के विसर्जन और आत्म-साक्षात्कार को समर्पित है। इसमें राग-आधारित माधुर्य और कॉल-एंड-रिस्पॉन्स गायन शैली का प्रयोग किया गया है, जो श्रोता को एक गहन ध्यानपूर्ण अवस्था में ले जाता है।

Lyrics

intro

मैं कौन हूँ, ये खोज मिट जाएअहं का ये बंधन, धीरे से छूट जाएशून्य में विलीन हो, ये मन की धारातेरा ही नूर, अब मुझको पुकारा

verse

मैं और मेरा, ये जाल पुरानामिटने लगा है, अब ये ठिकानासाँसों की डोरी, तुझमें ही उलझीख्वाहिशें मेरी, तुझमें ही पिघलीन कोई अपना, न कोई परायाखुद को खोकर, तुझको ही पाया

call-and-response
पुलक मन का

- तेरा ही साया

मिटा अहम्

- तूने ही अपनाया

जगा नूर

- तू ही है नूर

मिटा द्वैत

- अब सब है दूर

crescendo

हवाओं में घुली, तेरी ही महक हैये रूह मेरी, अब बे-झिझक हैमिटा दे मुझे, तू अपने रंग मेंडूबा हूँ मैं, तेरी तरंग मेंअहं का किला, ढहने लगा हैअमृत का प्याला, बहने लगा है

verse

न कोई सीमा, न कोई बंधनमिट गया सारा, ये भारीपनजैसे सागर में, बूँद समाईतेरी ही हस्ती, मुझमें है छाईअब मैं नहीं हूँ, तू ही तू हैये रूह मेरी, अब रूबरू है

call-and-response
पुलक मन का

- तेरा ही साया

मिटा अहम्

- तूने ही अपनाया

जगा नूर

- तू ही है नूर

मिटा द्वैत

- अब सब है दूर

outro

शून्य हुआ मन, शांत हुई कायातुझमें खोकर, खुद को ही पायातू ही है सत्य, तू ही है सारअर्पण है तुझको, ये जीवन-धारशांति ही शांति, बस तू ही पुकारसमाप्त हुआ मैं, तू ही है पार

शून्य की ओर

निर्गुण स्वर संगम

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शून्य की ओर by निर्गुण स्वर संगम | EchoLoRA: Generate a Song with AI