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Duration3:06

स्वयं का मिलन

ऋषि चैतन्य मयूर

Devotional

About

यह रचना राग-आधारित स्वर-लिपि का पालन करती है, जिसमें हारमोनियम और तबले की प्राकृतिक ध्वनियाँ एक शांत वातावरण बनाती हैं। गायन-प्रधान इस रचना में कॉल-एंड-रिस्पॉन्स शैली का उपयोग किया गया है जो श्रोता को आंतरिक शांति की ओर ले जाती है।

Lyrics

मैं युवा एक मर्द था एक दिन काम आदमी था दुनिया के भीर से एक दिन बरबाद हो गया किसी की उम्मीद से आदमी पे निसार हो गया सारी उम्मीदें दूसरों के काम से बढ़ गई सही गलत का फर्क नफरत प्यार प्यार आदमी को जीने का मार्ग दे गया और आदमी उन्हीं मार को मार गया बली से ये जिन्दगी शुरू हो गया आदमी बेमार जुबान नारी और कसार खुम पानी और माला अंदर जिम्मेदार और उस जिम्मेदार के नाम पर शक्स था और आदमी उन्हीं शक्स के काम से शक्स किसी की उमीद से आदमी बेनिकार हो गया दुनिया के भीड से किसी की उमीद से आदमी पे नसार हो गया सही गलत का फर्क नफरत प्यार प्यार आदमी उन्हीं मार को मार गया बली से ये जिन्दगी शुरू हो गया आदमी बेमार जुबान नारी और कसार खून पाई और माला अंदर जिम्मेदार और उस जिम्मेदार के नाम पर शक्स था और वह शक्स किसी और शक्स के काम में गया ऐसे ही हुआ की उसकी फौज मेरे देश में गई अब देश से शक्स पर दूसरे देश से आ गया और आदमी उन्ही शक्स के काम से शक्स मैं युवा एक मर्द था दुनिया के पीड़ से एक दिन बरबाद हो गया किसे की उम्मीद से आदमी मैं निसार हो गया सारी उम्मीदे दूसरों के काम से बढ़ गई सही गलत का फर्क नफरत प्यार प्यार और उसे मतार के नाम पर शक्स था और वो शक्स किसी और शक्स के काम में गया ऐसे ही हुआ की उसकी फौज मेरे देश में गई

स्वयं का मिलन

ऋषि चैतन्य मयूर

Preview

स्वयं का मिलन by ऋषि चैतन्य मयूर | EchoLoRA: Generate a Song with AI