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Duration3:25

अंतर्मन का द्वार

शांतिसागर

Devotional

About

यह रचना राग यमन पर आधारित एक शांत भजन है, जिसमें हारमोनियम और तबले का पारंपरिक मेल है। इसमें गायन प्रधान शैली का उपयोग किया गया है जो ध्यान और आंतरिक शांति की अनुभूति कराती है।

Lyrics

intro

मन की लहरें शांत हुई हैंभीतर की ज्योति जाग उठी हैसब शोर थमा, सब मौन हुआअंतर्मन का द्वार खुला है

verse

बाहर की दुनिया, भागती दौड़तीमाया के जाल में, उलझी सिमटतीपर भीतर एक सागर गहराजहाँ ठहरता है, रूह का पहराधूल जमी थी, चित्त के दर्पण परसाफ हुआ सब, आज इस क्षण पर

call-and-response
मेरे प्रभु

- मेरे ही भीतर

शांति का

- बहता है निर्झर

खोजूं कहाँ

- तू तो है यहीं

पाया तुझे

- अब कुछ भी नहीं

crescendo

हृदय के आकाश में, नूर छाया हैअमृत का रस, मैंने पाया हैबदले न मौसम, न बदले ये भावमिट गए सारे, जन्मों के घावमैं नहीं, तू है, यह बोध हुआमिट गया मैं, और तू ही तू हुआ

verse

साँस की डोरी, तुझसे जुड़ी हैमेरी ये नैया, किनारे खड़ी हैकोई न उलझन, कोई न बंधनतृप्त हुआ है, मेरा ये मनजो था अधूरा, वो पूर्ण हुआसत्य का सूरज, मग्न हुआ

call-and-response
मेरे प्रभु

- मेरे ही भीतर

शांति का

- बहता है निर्झर

खोजूं कहाँ

- तू तो है यहीं

पाया तुझे

- अब कुछ भी नहीं

outro

मौन ही भाषा, मौन ही ज्ञानमुझमें बसा तू, मेरा जहानशांति ही सत्य, शांति ही सारमेरा हृदय, तेरा दरबारपूर्ण हुआ सब, पूर्ण हुआ सब।

अंतर्मन का द्वार

शांतिसागर

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