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Duration3:09

शहर की चकाचौंध

धनीराम और माटी के राग

भारतीय लोक संगीत

About

यह गीत आधुनिक शहरी जीवन और ग्रामीण जड़ों के बीच के संघर्ष को दर्शाता है। इसमें ढोलक की थाप, बांसुरी का मधुर स्वर और पारंपरिक ताली की लय का अद्भुत मिश्रण है जो एक गहरी सामाजिक टिप्पणी प्रस्तुत करता है।

Lyrics

एक अच्छास धटक कोशिश्वास धवा खूस इत्ति तोर पूर्वल मेरा राजबुमा यहाँ पे मेरी राह गुला भी वो आगती सुखमा श्कुलो गेला दे लाखों में हमत ये तो पसाप यहाँ पे मेरी राह गुला भी वो आगती सुखमा श्कुलो गेला दे लाखों में हमत ये तो पसाप यहाँ पे मेरी राह गुला भी वो आगती सुखमा श्कुलो गेला दे लाखों में हमत ये तो पसाप श्कुलो गेला दे लाखों में हमत ये तो पसाप यहाँ पे मेरी राह गुला भी वो आगती सुखमा श्कुलो गेला दे लाखों में हमत ये तो पसाप यहाँ पे मेरी राह गुला भी वो आगती सुखमा श्कुलो गेला दे लाखों में हमत ये तो पसाप यहाँ पे मेरी राह गुला भी वो आगती सुखमा श्कुलो गेला दे लाखों में हमत ये तो पसाप यहाँ पे मेरी राह गुला भी वो आगती सुखमा श्कुलो गेला दे लाखों में हमत ये तो पसाप यहाँ पे मेरी राह गुला भी वो आगती सुखमा श्कुलो गेला दे लाखों में हमत ये तो पसाप यहाँ पे मेरी राह गुला भी वो आगती सुखमा श्कुलो गेला दे लाखों में हमत ये तो पसाप यहाँ पे मेरी राह गुला भी वो आगती सुखमा

शहर की चकाचौंध

धनीराम और माटी के राग

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