एकता की माला
लोक सुर संगम
भारतीय लोक संगीत
About
यह गीत ढोलक और मंजीरे की थाप पर आधारित एक सामुदायिक लोक संगीत है, जिसमें बांसुरी का मधुर सोलो और तालबद्ध ताली बजाने का समावेश है। इसमें लोक गायन की पारंपरिक शैली का उपयोग करते हुए एकता और भाईचारे का संदेश दिया गया है।
Lyrics
दुश्यासत बोलू ना जो बोलू उसे पूछलू आधारितक सामुधारिक लोग संगीत है जिसमें बासुरी कम धुरसल और ताल पढ़ ताली बचाने का सामावेश है इसमें लोग का यंकी पारंपरिक शैली का उपयोग करते हुए एकता और भैचारे का संदेश दिया गया है हो सामरे उमीत रे मिलकर चले ये रीत रहा तुम्हे हट एक आस है सबके दिलों में विश्वस है गली गली से आए है हम बाटने अपना हर एक रह तुम्हे हट एक आस है सबके दिलों में विश्वस है जाहार की जड़ी आडोर है बड़ी सबका मन बड़ दे अपने शन तुम्हे राखाई मैं तेरा मीद काईंगे मिलके प्रिम का गी इकता की माला में पिरोई है हम खुशियों के दीप खुज़ाए है हमना कोई अपना का हम बनी पलाया मिलके जो चले तो राहिन आसानिकता ही है अपनी असली पहचान दीबारें डहेंगी उम्मीदे खिलेंगी जब मिलके सबकी दुआएं मिलेंगी सूरज की किरने एक समान एकता ही है अपना इमान एकता की माला में तीरोई है हम खुशियों के दीप खुज़ाए है हमना कोई अपना का हम बनी पलाया मिलके जो चले तो राहिन आसानिकता ही है अपनी असली पहचान अपनी असली पहचान
एकता की माला
लोक सुर संगम
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