सच की थाप
सत्य भाई
भारतीय लोक संगीत
About
यह गीत एक शक्तिशाली सामाजिक टिप्पणी है, जिसमें ढोलक की थाप और बांसुरी की तीक्ष्ण धुन का अनूठा मेल है। इसमें पारंपरिक गायन शैली के साथ तालबद्ध ताली बजाने का प्रयोग किया गया है, जो श्रोताओं को सच्चाई का सामना करने के लिए प्रेरित करता है।
Lyrics
पास सोना तपोटा रहा क्या जिसमें धोलक की थाप और बासुरी की तिक्षन दुन का नूठा मिल है इसमें पारंपरिक गायन शैली के साथ तालबद ताली बजाने का प्रयोग किया गया है जो शुरुताओं को सच्चाई का सामना करने के लिए प्रेरित करता है ओरे ओ दुनिया वालों सच छुपा है कोन यहां अपना है रा क्या जो निकला ये दारा ये तोस्ताना सालाओ ये कैसी रीप चलाई तुमने इंसानियत को मारा स्वार्थ की सांधी में डूबा है जग सारा सच की राज कठिन है भाई पर चलना ही होगा अंधेरे के इस साये से अपन तो निकलना आगा ये बड़े बेबड़े वादों की माला गले में सब ने टाली पर अंदर से खोकली देखो नियत है इनकी खाली जो महनत करता पसीने से उसका हक चिन जाता और जो बैठा उचे दख्तों पर वो ही राजा कहलाता मिट्टी का करच चुकाना भूल गए ये सारे अपने ही घर में देखो सब बन रहे हैं बटवारे बात शर्ग का दोर से दिन आने का पहला रात ये परक्स आंद्रियान का परक्स भी इनकी आंधिरा लिया अपने ही घर में देखो सब बन रहे हैं बटवारे
सच की थाप
सत्य भाई
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