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Duration3:29

अमर गाथाओं की गूँज

लोक रक्षक मंडली

भारतीय लोक संगीत

About

यह गीत पारंपरिक ढोलक की थाप और बाँसुरी की मधुर तान के साथ एक पौराणिक कथा का वर्णन करता है। इसमें लयबद्ध ताली और सूक्ष्म स्वर-लहरियों का प्रयोग किया गया है जो भारतीय लोक संस्कृति की गहराई को जीवंत करते हैं।

Lyrics

यम्मा एपला इस जीवन कच्चिरिया है श्रद्धा विश्णु नमस्कार अधुरा और जूशन के विरशडम्या अधुरा और जूशन के विरशडम्या राजाओं के शार्या और राणी के ताक्का है संगम सुनो धान से ये सुर धड़कन में भर देंगे नैश्चितों में भर देंगे नैश्चितों में भर देंगे नैश्चितों में भर देंगे इस मिट्टी के कनकन से ये तारों से पूछो या पूछो बहती इस पावंधारा से देवों की लिलाएं चूडी हैं इस मिट्टी के कनकन से ना काल का पन्धन ना सीमा का कोई घेड़ा ये पूछो या पूछो ये कथा तो है सूर्ज की ये कथा है सवेरा पीड़ी दर पीड़ी चलती ये अनमोल विरासत है हमारी संस्कृटी की ये ही तो सबसे बड़ी बहतत है ये कथा है लुगों की ये कथा है विश्वास की ये अमर गाथा है मेरे भारत के इतिहासित की तारों से पूछो या पूछो बहती इस पामंधारा से देवों की लिलाएं जूड़ी हैं इस मिट्टी के कंगन से मिट्टी से जूड़े हैं हम मिट्टी में मिल जाएंगे ये गाथाएं हम आने बाली पीड़ी को सुनाएंगे अमर रहे ये जान अमर रहे ये बतन गाते रहो तुम गाते रहे हम

अमर गाथाओं की गूँज

लोक रक्षक मंडली

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अमर गाथाओं की गूँज by लोक रक्षक मंडली | EchoLoRA: Generate a Song with AI