मन के मंदिर में ज्योत
गंगा किनारी
भारतीय लोक संगीत
About
यह गीत पारंपरिक ढोलक और मंजीरे की थाप पर आधारित एक भक्तिपूर्ण रचना है, जिसमें बाँसुरी का मधुर सोलो और लयबद्ध तालियाँ शामिल हैं। इसमें मोडल गायन शैली का प्रयोग किया गया है जो भारतीय लोक संगीत की जड़ों को जीवंत करता है।
Lyrics
ओ मनवा जाग जा अब तो आग जा पिया की राह में पलकें बिच्छा जा नदिया के तीर पर खड़ी मैं अकेली सांसों में बसी है तेरी ही पहली माथे पेक लक हाथों में माला तुम बिन प्रभू क्या ये जीवन है काला पग पग पे ढूणू तुमको ही हर दम मिट जाए मेरे ये सारे ही गम ओ मेरे सावरे ओ मेरे मीता तेरी ही धुन में बिते ये गीता तु ही है सागर तु ही किनारा तेरी शरण में मिला है सहारा हे प्रभू तेरी महिमा पुरंपार सागर की लहरों में तेरा ही प्यार मन के मंदिर में जोट जलाओ पल पल मैं तेरी छवी को बाओ तु ही आधा तु ही है दाता तेरी ही भकती सब कुछ बाता हे प्रभू तेरी महिमा पुरंपार सागर की लहरों में तेरा ही प्यार मन के मंदिर में जोट जलाओ पल पल मैं तेरी छवी को बाओ तु ही आधा तु ही है दाता तेरी ही भकती सब कुछ बाता ना मांगू धन ना मांगू मैं माया बस तु ही देवे अपनी ये छाया मिट जाए दूरी मिट जाए अंतर तु ही बस जाए मेरे ही भीतर हे प्रभू तेरी महिमा परमपार सागर की लहरों में तेरा ही प्यार मन के मंदिर में जोट जलाओ पल पल मैं तेरी छवी को बाओ तु ही आधा तु ही है दाता तेरी ही भकती सब कुछ बाता तेरा ही नाम मेरा सहारा तु ही है स्वामी तु ही है प्यारा तु बस
मन के मंदिर में ज्योत
गंगा किनारी
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