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Duration3:01

मौसम की जुबानी

आकाश और लोक धुनें

भारतीय लोक संगीत

About

यह गीत बदलते मौसमों के चक्र को एक पारंपरिक लोक शैली में दर्शाता है, जिसमें ढोलक की थाप और बांसुरी की मधुर तान का अनूठा संगम है। इसमें लयबद्ध ताली और सूक्ष्म स्वर-लहरियों का प्रयोग किया गया है जो भारतीय ग्रामीण परिवेश की सोंधी खुशबू को जीवंत करते हैं।

Lyrics

रूप कुंकामित आज जुन में पले था साज सोही तिन ये सनम लप्पी का है रंग धन धन धन धन धन धन आज सुने आज बाते अधूरे ये सनम रूप कुंकामित आज जुन में पले था साज सोही तिन ये सनम लप्पी का है रंग धन धन धन धन धन धन आज सुने आज बाते अधूरे ये सनम रूप कुंकामित आज जुन में पले था साज सोही तिन ये सनम लप्पी का है रंग धन धन धन धन धन धन धन धन आज सुने आज बाते अधूरे ये सनम रूप कुंकामित आज जुन में पले था साज सोही तिन ये सनम आज महीर बहने गई पल कुड़ी रोशन साई आँचल छोड़ो दो गई चंदन पे रहे गई गलियों में सुने सुने दोस्तों की बाते समझे तेरे सनम समझू तुझे सनम धूरे ये सनम ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढन ढ अधूरी लिसन घनमारावी सब कुछ पडले बदले इस जानी अधूरी लिसन घनमारावी सब कुछ पडले इस जानी

मौसम की जुबानी

आकाश और लोक धुनें

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