यादों की चादर
धरा धुन
भारतीय लोक संगीत
About
यह गीत प्राचीन पौराणिक कथाओं को जीवंत करता है, जिसमें ढोलक की थाप और बांसुरी की मधुर तान का अनूठा संगम है। इसमें पारंपरिक ताल और लयबद्ध ताली के साथ लोक गायन की गहराई को महसूस किया जा सकता है, जो सुनने वाले को मिट्टी की जड़ों से जोड़ती है।
Lyrics
ओ री सखी, सुन आज ये गाथा पुरानी,बीते युगों की है ये अमृत सी कहानी।धरती ने ओढ़ी है यादों की चादर,सुन ले तू भी, ओ प्रेम की दीवानी।
सागर की लहरों ने पत्थर पे लिखा था,जो सत्य युग का सूरज कभी न दिखा था।वो वीर चले थे, वो राहें बनी थीं,देवों की माया, ये दुनिया ठगी थी।माटी के कण में वो नाम समाए,पुरखों के साये यहाँ आज भी आए।
ये कथा है युगों की, ये कथा है अमर,मिट्टी के आँगन में, गूँजे है डगर।हवाओं में घुली है वो पुरानी पुकार,सुन ले तू मनवा, ये है अपना प्यार।ये कथा है युगों की, ये कथा है अमर।
वो वनवास काटे, वो लंका को जीते,वो अमृत के प्याले जो ऋषि मुनि पीते।नदियों के तट पे वो दीपक जलाए,अंधियारे पथ पे वो राहें दिखाए।जो बीत गया वो, अब भी है जिंदा,हर एक सांस में है, वो रूह का परिंदा।
ओ राही, ओ राही, रुक जा तू पल भर,सुन ले ये गाथा, ये है अपना घर।
ये कथा है युगों की, ये कथा है अमर,मिट्टी के आँगन में, गूँजे है डगर।हवाओं में घुली है वो पुरानी पुकार,सुन ले तू मनवा, ये है अपना प्यार।ये कथा है युगों की, ये कथा है अमर।
ना कोई अंत है, ना कोई शुरुआत है,ये तो बस सावन की पहली बरसात है।मिट्टी महकती, ये यादें संवरती,हर एक धड़कन में, ये दुनिया निखरती।
ओ राही, ओ राही, रुक जा तू पल भर,सुन ले ये गाथा, ये है अपना घर।
ये कथा है युगों की, ये कथा है अमर,मिट्टी के आँगन में, गूँजे है डगर।हवाओं में घुली है वो पुरानी पुकार,सुन ले तू मनवा, ये है अपना प्यार।ये कथा है युगों की, ये कथा है अमर।
अमर है ये गाथा, अमर है ये नाम,मिट्टी की गोद में, अब आराम।सुन ले तू मनवा, ये है अपना प्यार।अमर है ये गाथा, अमर है ये प्यार।
यादों की चादर
धरा धुन
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