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Duration3:29

यादों की चादर

धरा धुन

भारतीय लोक संगीत

About

यह गीत प्राचीन पौराणिक कथाओं को जीवंत करता है, जिसमें ढोलक की थाप और बांसुरी की मधुर तान का अनूठा संगम है। इसमें पारंपरिक ताल और लयबद्ध ताली के साथ लोक गायन की गहराई को महसूस किया जा सकता है, जो सुनने वाले को मिट्टी की जड़ों से जोड़ती है।

Lyrics

intro

ओ री सखी, सुन आज ये गाथा पुरानी,बीते युगों की है ये अमृत सी कहानी।धरती ने ओढ़ी है यादों की चादर,सुन ले तू भी, ओ प्रेम की दीवानी।

verse

सागर की लहरों ने पत्थर पे लिखा था,जो सत्य युग का सूरज कभी न दिखा था।वो वीर चले थे, वो राहें बनी थीं,देवों की माया, ये दुनिया ठगी थी।माटी के कण में वो नाम समाए,पुरखों के साये यहाँ आज भी आए।

chorus

ये कथा है युगों की, ये कथा है अमर,मिट्टी के आँगन में, गूँजे है डगर।हवाओं में घुली है वो पुरानी पुकार,सुन ले तू मनवा, ये है अपना प्यार।ये कथा है युगों की, ये कथा है अमर।

verse

वो वनवास काटे, वो लंका को जीते,वो अमृत के प्याले जो ऋषि मुनि पीते।नदियों के तट पे वो दीपक जलाए,अंधियारे पथ पे वो राहें दिखाए।जो बीत गया वो, अब भी है जिंदा,हर एक सांस में है, वो रूह का परिंदा।

refrain

ओ राही, ओ राही, रुक जा तू पल भर,सुन ले ये गाथा, ये है अपना घर।

instrumental-break
chorus

ये कथा है युगों की, ये कथा है अमर,मिट्टी के आँगन में, गूँजे है डगर।हवाओं में घुली है वो पुरानी पुकार,सुन ले तू मनवा, ये है अपना प्यार।ये कथा है युगों की, ये कथा है अमर।

bridge

ना कोई अंत है, ना कोई शुरुआत है,ये तो बस सावन की पहली बरसात है।मिट्टी महकती, ये यादें संवरती,हर एक धड़कन में, ये दुनिया निखरती।

refrain

ओ राही, ओ राही, रुक जा तू पल भर,सुन ले ये गाथा, ये है अपना घर।

chorus

ये कथा है युगों की, ये कथा है अमर,मिट्टी के आँगन में, गूँजे है डगर।हवाओं में घुली है वो पुरानी पुकार,सुन ले तू मनवा, ये है अपना प्यार।ये कथा है युगों की, ये कथा है अमर।

outro

अमर है ये गाथा, अमर है ये नाम,मिट्टी की गोद में, अब आराम।सुन ले तू मनवा, ये है अपना प्यार।अमर है ये गाथा, अमर है ये प्यार।

यादों की चादर

धरा धुन

Preview

यादों की चादर by धरा धुन | EchoLoRA: Generate a Song with AI