कभी धूप कभी छांव
सावन रागिनी
भारतीय लोक संगीत
About
यह गीत भारतीय लोक संगीत की परंपरा में रचित है, जिसमें ढोलक की थाप और मंजीरे की गूंज के साथ बांसुरी का मधुर सोलो शामिल है। इसमें ऋतुओं के चक्र और जीवन के बदलावों को पारंपरिक ताल और लयबद्ध ताली के साथ खूबसूरती से पिरोया गया है।
Lyrics
ओ रे ओ, मनवा रेऋतुओं का फेरा, जैसे जीवन का घेरा
तपती दोपहरी में जब लू चलती हैसूखी धरती प्यास में जलती हैआसमान से अंगारे बरसते हैंपंछी भी छांव को तरसते हैंधूप का ये पहरा, जैसे कोई कड़ा इम्तिहानमिट्टी की सोंधी खुशबू का है बस एक अरमान
आओ सावन, बरसो रेमन के आंगन में, खुशियां भर दो रे
मौसम बदले, रंग बदले, बदले ये संसारपतझड़ की विदाई में, फिर से बहारकभी धूप, कभी छांव, कभी रिमझिम फुहारबदलाव ही है इस जीवन का असली आधार
सुनहरी फसलें खेतों में लहराती हैंकोयलिया कूक कर यादें जगाती हैंठंडी हवाएं जब ओढ़नी उड़ाती हैंनई उम्मीदें मन में घर बना जाती हैंबर्फ की चादर ओढ़े जब पहाड़ मुस्कुराएंपुरानी बातें पीछे छोड़, नई राहें बनाएं
मौसम बदले, रंग बदले, बदले ये संसारपतझड़ की विदाई में, फिर से बहारकभी धूप, कभी छांव, कभी रिमझिम फुहारबदलाव ही है इस जीवन का असली आधार
समय का पहिया रुकता नहीं हैजो बीत गया, वो मुड़ता नहीं हैहर मौसम एक सबक सिखाता हैमिट्टी को फिर से महकाता हैधैर्य रखो, ये दिन भी ढल जाएंगेनए सवेरे फिर मुस्कुराएंगे
मौसम बदले, रंग बदले, बदले ये संसारपतझड़ की विदाई में, फिर से बहारकभी धूप, कभी छांव, कभी रिमझिम फुहारबदलाव ही है इस जीवन का असली आधार
बदलाव ही जीवन हैबदलाव ही आधार हैऋतुओं का ये खेल, निराला अपार हैफिर आएगा नया सवेराफिर होगा नया बसेरा
कभी धूप कभी छांव
सावन रागिनी
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