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Duration3:39

कभी धूप कभी छांव

सावन रागिनी

भारतीय लोक संगीत

About

यह गीत भारतीय लोक संगीत की परंपरा में रचित है, जिसमें ढोलक की थाप और मंजीरे की गूंज के साथ बांसुरी का मधुर सोलो शामिल है। इसमें ऋतुओं के चक्र और जीवन के बदलावों को पारंपरिक ताल और लयबद्ध ताली के साथ खूबसूरती से पिरोया गया है।

Lyrics

intro

ओ रे ओ, मनवा रेऋतुओं का फेरा, जैसे जीवन का घेरा

verse

तपती दोपहरी में जब लू चलती हैसूखी धरती प्यास में जलती हैआसमान से अंगारे बरसते हैंपंछी भी छांव को तरसते हैंधूप का ये पहरा, जैसे कोई कड़ा इम्तिहानमिट्टी की सोंधी खुशबू का है बस एक अरमान

refrain

आओ सावन, बरसो रेमन के आंगन में, खुशियां भर दो रे

chorus

मौसम बदले, रंग बदले, बदले ये संसारपतझड़ की विदाई में, फिर से बहारकभी धूप, कभी छांव, कभी रिमझिम फुहारबदलाव ही है इस जीवन का असली आधार

verse

सुनहरी फसलें खेतों में लहराती हैंकोयलिया कूक कर यादें जगाती हैंठंडी हवाएं जब ओढ़नी उड़ाती हैंनई उम्मीदें मन में घर बना जाती हैंबर्फ की चादर ओढ़े जब पहाड़ मुस्कुराएंपुरानी बातें पीछे छोड़, नई राहें बनाएं

instrumental-break
chorus

मौसम बदले, रंग बदले, बदले ये संसारपतझड़ की विदाई में, फिर से बहारकभी धूप, कभी छांव, कभी रिमझिम फुहारबदलाव ही है इस जीवन का असली आधार

bridge

समय का पहिया रुकता नहीं हैजो बीत गया, वो मुड़ता नहीं हैहर मौसम एक सबक सिखाता हैमिट्टी को फिर से महकाता हैधैर्य रखो, ये दिन भी ढल जाएंगेनए सवेरे फिर मुस्कुराएंगे

chorus

मौसम बदले, रंग बदले, बदले ये संसारपतझड़ की विदाई में, फिर से बहारकभी धूप, कभी छांव, कभी रिमझिम फुहारबदलाव ही है इस जीवन का असली आधार

outro

बदलाव ही जीवन हैबदलाव ही आधार हैऋतुओं का ये खेल, निराला अपार हैफिर आएगा नया सवेराफिर होगा नया बसेरा

कभी धूप कभी छांव

सावन रागिनी

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