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Duration2:57

एकता का दीप

साजन साथी मंडली

भारतीय लोक संगीत

About

यह गीत ढोलक की थाप और करताल की लय पर आधारित एक पारंपरिक लोक रचना है, जो सामुदायिक एकता का संदेश देती है। इसमें बांसुरी का मधुर सोलो और समूह द्वारा की गई तालबद्ध तालियों का प्रयोग किया गया है, जो इसे एक जीवंत और सांस्कृतिक अनुभव बनाता है।

Lyrics

हो साजन हो साथी हम आज मिलकर गाएं मिलकर बजाएं अपनों का बिट्टी की सुन्धी खुश्बू में सब का मान बसा है एक धागे में मूती जैसे सारा जहान बसा है हाथ में हाथ धाम कर राहे नई बनाएंगे दुका सुकी इस पगडंगी पर दिल कर गीत गाएंगे एक दा का दीप जलाएं मिलकर हम सब भाई उंच नीच की बेडियां तोडें खुशिया हमने पाई सब का सद सब का बल यही हमारी शान है एक सुर में बोले दुनिया ये अपना हिंदुस्तान है जब भी कोई मुश्किल आए कंधे से कंधा जोडें तूटे हुए सपनों को हम फिर से नया मोड दें एक आंगन में बैठें सब एक ही थाली में खाएं भेद भाव का नाम ना ले प्यार की अलग जगाएं एक ताका दीव जलाएं मिलकर हम सब भाई उंच नीच की बेडियां तोडें खुशिया हमने पाई सब का सद सब का बल यही हमारी शान है एक सुर में बोले दुनिया ये अपना हिंदुस्ताद है नदियां जैसे सागर में आपकर सब मिल जाती हैं वैसे ही हम साथ खड़े खुशहाली नदियां जैसे सागर में आपकर सब मिल जाती हैं ये आती हैं जो रेंग दिल के तार सभी नफरत को दूर भगाएं मिलकर राज इस पस्ती में खुशियों का जश्न मनाएं एक ताका दीब जलाएं मिलकर हम सब भाई उच्छी नीच की बेडियां तोड़ें खुशिया हमने पाई सबका साथ सबका बल यही हमारी शान है सुर में बोले दुनिया ये अपना हिंदुस्तान है मिलकर राएं मिलकर राएं ताका ये मान बड़ाएं सब साज है सब पास है यही तो अपना विश्वास है

एकता का दीप

साजन साथी मंडली

Preview

एकता का दीप by साजन साथी मंडली | EchoLoRA: Generate a Song with AI