एकता का धागा
सांझा स्वर
भारतीय लोक संगीत
About
यह गीत पारंपरिक ढोलक और मंजीरे की थाप पर आधारित है, जो सामुदायिक एकता का संदेश देता है। इसमें बांसुरी का मधुर सोलो और तालबद्ध ताली की ध्वनि भारतीय लोक संगीत की जीवंतता को दर्शाती है।
Lyrics
ओ सांवरे, ओ मीत मेरेमिलकर चलें, ये राहें हैं अपनीहाथों में हाथ, और दिल में आसजुड़ें जो तार, तो बने विश्वास
खेतों की मिट्टी में महक है अपनों कीसाझा है धूप, और साझा है ये छायाएक दूजे के दुख में, जो आंसू पोंछ लेवही तो है अपना, वही है असली मायाटूटी हुई दीवारें, अब हम मिलकर जोड़ेंगेपुरानी सब रंजिशें, आज हम पीछे छोड़ेंगे
एकता का धागा, सबने थाम लियाभाईचारे का हमने, नाम लिया
मिलकर गाएं, मिलके जिएंखुशियों के सागर, हम सब पिएंएकता की शक्ति, है सबसे महानजुड़ा है हम सबसे, ये सारा जहानसबके कदम एक, सबकी है धुनबदलेगा अपना, ये सारा चुन
चौपाल पे बैठें, तो बातें पुरानी होंहंसी के ठहाके, और रीतें सुहानी होंकोई पराया नहीं, इस आंगन के बीच मेंहम सब बंधे हैं, एक ही प्रेम की खींच मेंन कोई ऊंचा, न कोई नीचा यहाँमिलकर जो चलें, तो खुशहाल है जहाँ
आंच न आने दें, हम इस मेल परविश्वास की नींव, है अपने खेल परसूरज की पहली किरण, जब साथ लाएगीये एकता की मूरत, सबको भाएगीमिट जाएं भेद, सब दूरियां खो जाएंएक ही रंग में, हम सब रंग जाएं
मिलकर गाएं, मिलके जिएंखुशियों के सागर, हम सब पिएंएकता की शक्ति, है सबसे महानजुड़ा है हम सबसे, ये सारा जहानसबके कदम एक, सबकी है धुनबदलेगा अपना, ये सारा चुन
साझा है सपना, साझा है ये गानएकता ही है, हम सबकी पहचानमिलकर चलें, सदा साथ रहेंबस प्रेम की भाषा, हम सब कहेंहम सब कहें, हम सब कहें।
एकता का धागा
सांझा स्वर
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