सिक्कों से सितारे
स्वप्निल सूर्य
Indian Pop
About
यह गाना एक आधुनिक इंडियन पॉप ट्रैक है जिसमें सिंथेसाइज़र की चमकदार परतों के साथ पारंपरिक ढोलक की थाप का बेहतरीन मिश्रण है। इसमें एक प्रेरणादायक धुन है जो शहरी आकांक्षाओं और संघर्षों को एक ऊर्जावान बीट के साथ दर्शाती है।
Lyrics
उठे उजाउता है सपना अभी में चमकती एक अमिद है शुरू करते है सफर इन तंग गलियों से निकल कर आसमान को छुने की चाहत है जेब में बस कुछ सिक्के हैं परणी रादों में पूरी कायनात है भीड के इस शोर में भी अपनी एक अलग पहचान बनानी है तो था फासला जो से मिटा कर आगे बढ़ना है बूद अखें एक गोरा नहीं हाथ बूद उठें पासमों को शहर की रोशनियों में खोना नहीं अपने सपनों को कभी सोने नहीं बुड़ान भरनी है अब तो आबना है खुशियों की मेर को सबसे आगे लाना है ये मर्दों के पीछे चुक्ते हुई मेरी हकीकत है संगर सीधी ओपर की इन सीधी ओपर अब छोड़ दी आज की जीत ही मेरी बादत है इन सीधी ओपर अब छोड़ दी आज की जीत ही मेरी बादत ही शहर की इन रोशनियों में खोना नहीं अपने सपनों को कभी सोने नहीं उड़ान भरनी है अब तो आबना है खुशियों की मेर को सबसे आगे लाना है ये मर्दों के पीछे चुक्ते हुई मेरी हकीकत है संगर सीधी ओपर की इन सीधी ओपर अब छोड़ दी आज की जीत ही मेरी बादत है
सिक्कों से सितारे
स्वप्निल सूर्य
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