ऊँची उड़ान
उत्कर्ष उपाध्याय
Indian Pop
About
यह गाना एक आधुनिक इंडि-पॉप ट्रैक है जिसमें सिंथेसाइज़र और ढोल की लय का मिश्रण है। इसमें शहरी आकांक्षाओं को दर्शाते हुए एक प्रेरणादायक धुन और ऊर्जावान बीट्स का उपयोग किया गया है जो सुनने वाले को जोश से भर देती है।
Lyrics
सबनों की गलियां अब खुला ही है खिड़कियां उची और आखों में है जोर मंग जोर मंजल बुलाए मुझे चारो और भीड में खोया था मैं कल तक कंजान अब हाथों में मेरे अपना जहान पुरानी उन सडकों को बीचे छोड़ा है किसमत का ताला मैंने खुद ही तोड़ा है कांच की इनने मारतों में अपनी परचाएं कल की वो धुनधली सी आदे मिटाएं सरकन में शोर है कुछ कर दिखाने कामों का मिला है मुझे आगे बढ़ जाने का सूर की पहली किरण साथ मेरे है अब जीत का ये सफर हाथ मेरे है ये शहर नया ये रात नई मेरी आखों में एक बात नई उचे रादे और हसलों की ओडान बनना है मुझे अपनी पचान मुझे रादे और हसलों की ओडान बनना है मुझे अपनी पचान तकना मनना है यहाँ रुकना गुना है मंजल मेरी देखो कितनी पना है रिष्टे बनाएं मैंने अब नए मोड़ पर चलना है मुझे को अब सब कुछ छुड़ करता है साथ चमकूं इस फीड में मैं लिखूंगा अपनी कहानी तक्तीर में मैं धरकन में शोर है कुछ कर दिखाने कामों का मिला है मुझे आगे बढ़ जाने का सुरकी पहली खिरान साथ मेरे है अब जीत का ये सफर हाथ मेरे है ये शहर नया ये रात नई मेरी आखों में एक बात नई उचे इरादित और हसलों की उड़ान बनना है मुझे अपनी पैचान की रूँगा तो फिर से संभर जाओ मैं आग का दरिया निकल जाओंगा कोई न रूगे अब मेरी रफ़तार को मैंने चुलिया है अपने उस प्यार को शहर मेरा आगे बरूं सपनों के पीछे अब मैं चलूं ये शहर मेरा ये आसमा मेरा अब हर लमा है जैसे सविरा अपनी पैचान मेरी अपने उड़ान बनना है अब मैं चलूं ये शहर मेरा आगे बरूं सपनों के पीछे अब मैं चलूं मेरी अपनी पैचान मेरी अपनी पैचान
ऊँची उड़ान
उत्कर्ष उपाध्याय
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