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Duration2:51

سونا اگلتی دھرتی

ساگر فقیر اور ساتھی

Pakistani Folk

About

یہ گیت روایتی ڈھول کی تھاپ اور رباب کی مدھر دھنوں کا حسین امتزاج ہے، جس میں فصل کی کٹائی کے جشن کو بھرپور انداز میں پیش کیا گیا ہے۔ اس میں مائیکروٹونل آوازوں اور نامیاتی پرکشن کی تہوں کا استعمال کیا گیا ہے جو دیہی پنجاب اور سندھ کی ثقافتی روح کو اجاگر کرتا ہے۔

Lyrics

जन्नत की मिश्चिती ये गई अजाबत मौत पे आगई दुनिया में मांगे सजा दिया दुनी का अशिक जिन्दगी सब सुना दिया एरादा नहीं श्री कृष्ण किस माला केरंद स्वामी श्री कृष्ण किस माला केरंद स्वामी श्री कृष्ण किस माला केरंद स्वामी श्री कृष्ण किस माला केरंद स्वामी श्री कृष्ण किस माला केरंद स्वामी श्री कृष्ण किस माला केरंद स्वामी माई तो तोड़ स्वामी दुनिया का रंग है श्री कृष्ण किस माला केरंद स्वामी माई तो तोड़ स्वामी दुनिया का रंग है श्री कृष्ण किस माला केरंद स्वामी माई तो तोड़ स्वामी दुनिया का रंग है श्री कृष्ण किस माला केरंद स्वामी माई तो तोड़ स्वामी दुनिया का रंग है श्री कृष्ण किस माला केरंद स्वामी माई तो तोड़ स्वामी दुनिया का रंग है श्री कृष्ण किस माला केरंद स्वामी माई तो तोड़ स्वामी दुनिया का रंग है जन्नत की निश्चती ये गाई अजाबत मौत पे आ गई दुनिया में मांग सजा दिया दुनी का अशिक जिन्दगी सब सुना दिया ये राज

سونا اگلتی دھرتی

ساگر فقیر اور ساتھی

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سونا اگلتی دھرتی by ساگر فقیر اور ساتھی | EchoLoRA: Generate a Song with AI