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Duration3:38

پرانے قصے

سائیں گلزار احمد

Pakistani Folk

About

یہ گیت روایتی ڈھول اور رُباب کی گہری تھاپ کے ساتھ ایک جذباتی سفر ہے، جس میں صوفیانہ شاعری اور مائیکرو ٹونل آواز کے اتار چڑھاؤ کو نمایاں کیا گیا ہے۔ اس کی پروڈکشن میں نامیاتی سازوں کی گونج اور صوتی گہرائی پر توجہ دی گئی ہے تاکہ قدیم دیہی ورثے کی روح کو زندہ کیا جا سکے۔

Lyrics

श्रंगूप लेन बस कियो स्वान मिलो विशय भूत पाप हाँ जहां सारे लाई अक्षर को स्वान है दिल स्वान मिलका सुन ये नादान मां स्वान सठा श्रंगूप लेन बस कियो स्वान मिलो विशय भूत पाप हाँ जहां सारे लाई श्रंगूप लेन बस कियो स्वान मिलो विशय भूत पाप हाँ जहां सारे लाई श्रंगूप लेन बस कियो स्वान मिलो विशय भूत पाप हाँ जहां सारे लाई अक्षर को स्वान है दिल स्वान मिलका सुन ये नादान मां स्वान सठा श्रंगूप लेन बस कियो स्वान मिलो विशय भूत पाप हाँ जहां सारे लाई श्रंगूप लेन बस कियो स्वान मिलो विशय भूत पाप हाँ जहां सारे लाई अक्षर को स्वान है दिल स्वान मिलका सुन ये नादान मां स्वान सठा श्रंगूप लेन बस कियो स्वान मिलो विशय भूत पाप हाँ जहां सारे लाई श्रंगूप लेन बस कियो स्वान मिलका श्रंगूप लेन बस कियो स्वान मिलो विशय भूत पाप हाँ जहां सारे लाई अक्षर को स्वान है दिल स्वान मिलका सुन ये नादान मां स्वान सठा श्रंगूप लेन बस कियो स्वान मिलो विशय भूत पाप हाँ जहां सारे लाई अक्षर को स्वान हाँ जहां सारे लाई

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سائیں گلزار احمد

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