शून्य का समर्पण
आर्यमन सुरम्य
हिंदुस्तानी शास्त्रीय
About
यह रचना तानपुरा की गूंजती ड्रोन ध्वनि के साथ शुरू होती है, जो धीरे-धीरे तबला के जटिल ताल चक्रों और राग आधारित माधुर्य में विकसित होती है। इसमें मानवीय स्वर की सूक्ष्म गमक और शास्त्रीय बारीकियों का समावेश है, जो एक गहरे ध्यानपूर्ण और भक्तिमय वातावरण का निर्माण करता है।
Lyrics
सुध-बुध खोई, मन मगन भयोअनंत की खोज में, शून्य हुआ संसारभीतर जलती ज्योति, बाहर धुंधली राहप्राणों के स्पंदन में, केवल नाम तेरा ही आधार
पल-पल बीतता, रीतता जाता ये जीवनजैसे सरिता बहे, सागर की प्यास लिएअंधियारे नयन, अब पथ खोजते नहींबस एक झलक तेरी, इस हृदय की आस लिए
मिट गई दूरी, अब मिट गई ये पहचानतू ही है आराध्य, तू ही है मेरा मानसाँस की डोर पर, तेरा ही नाम बुनूँतेरे ही चरणों में, अपना ये सब अर्पण करूँतू ही है आदि, तू ही है अंत का विस्तारमेरे प्रभु, स्वीकार कर मेरा ये मौन पुकार
तेरी भक्ति का रंग, मुझ पर चढ़ जाएतेरी भक्ति का रंग, मुझ पर चढ़ जाएतेरी भक्ति का रंग, मुझ पर चढ़ जाए
अग्नि सा जलना, जल सा शीतल होनास्वयं को मिटाकर, तुझमें ही खोनान कोई बंधन, न कोई अब संशय शेषतेरी करुणा में, धुल गए सब क्लेशपूर्ण हुआ समर्पण, पूर्ण हुआ ये ध्यानतू ही सत्य है, तू ही मेरा निर्वाण
शून्य का समर्पण
आर्यमन सुरम्य
Preview