शून्य सावन चक्र
उस्ताद इनायत खान
हिंदुस्तानी शास्त्रीय
About
यह रचना सावन की वर्षा और बदलते मौसमों के चक्र को राग आधारित संरचना में पिरोती है। इसमें तानपुरा की गूंज और तबला के जटिल ताल चक्रों के साथ बांसुरी की मधुर तान का समावेश है, जो एक ध्यानपूर्ण वातावरण बनाती है।
Lyrics
शून में लीन हुआ मन मेरा खो गई देखी हर एक रेखां दियारे में छिपी है जूती भी तरही सोई है चेतना की मूती शून में लीन हुआ मन मेरा खो गई देखी हर एक रेखां दियारे में छिपी है जूती भी तरही सोई है श्वास की टोरी से बंधा है संसर सुंखे आने जाने का है विस्तारन कोई बंधन ना कोई डा बाकी स्वयं हुआ है समय जैसे दहता हुआ जलमिट की बुंदे बढ़ती है हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ ह हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ ह हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ
शून्य सावन चक्र
उस्ताद इनायत खान
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