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Duration2:50

अखंड आत्मद्वार

पंडित शून्यदीप जोशी

हिंदुस्तानी शास्त्रीय

About

यह रचना तानपुरा की गूंज और तबले के सूक्ष्म ताल चक्रों के साथ एक आध्यात्मिक यात्रा प्रस्तुत करती है। राग आधारित मेलोडिक संरचना और गमक का प्रयोग इसे एक गहन ध्यानपूर्ण अनुभव बनाता है।

Lyrics

शून में लीन हुआ मन मेरा खो गई देखी हर एक रेखां दियारे में छिपी है जूती भी तरही सोई है चेतना की मूती शून में लीन हुआ मन मेरा खो गई देखी हर एक रेखां दियारे में छिपी है जूती भी तरही सोई है श्वास की टोरी से बंधा है संसर सुंखे आने जाने का है विस्तारन कोई बंधन ना कोई डा बाकी स्वयं हुआ है समय जैसे दहता हुआ जलमिट की बुंदे बढ़ती है हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ ह हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ ह हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ हुआ

अखंड आत्मद्वार

पंडित शून्यदीप जोशी

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अखंड आत्मद्वार by पंडित शून्यदीप जोशी | EchoLoRA: Generate a Song with AI